लखनऊ: 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं, ठीक उसी समय कांग्रेस नेताओं का मायावती के आवास पर बिना अनुमति और बिना तय कार्यक्रम के पहुंचना सियासी हलचल का सबब बन गया. मंगलवार (20 मई) शाम को कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सांसद तनुज पुनिया समेत कुछ नेताओं ने लखनऊ में BSP सुप्रीमो मायावती के आवास पर पहुंचकर मुलाकात करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बैरंग ही लौटना पड़ा.
मायावती ने इस अनाधिकारिक दौरे को कोई भाव नहीं दिया और मुलाकात नहीं की. यह घटना इसलिए भी ज्यादा चर्चा में आई क्योंकि यह दौरा ठीक उसी समय हुआ जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी रायबरेली में अपनी यात्रा पर थे. तनुज पुनिया ने बताया कि यह दौरा पूरी तरह से सद्भावना भेंट के रूप में था. उन्होंने कहा कि हमारी बैठक BSP आवास के पास ही थी. गुजरते हुए हमने सोचा कि वरिष्ठ नेता और हमारे समाज की बहन जी से शिष्टाचार मुलाकात कर लें.
पुनिया ने यह भी साफ किया कि वे कोई संदेश लेकर नहीं गए थे और राहुल गांधी का नाम इस मामले में नहीं जोड़ा जाना चाहिए. हालांकि, कांग्रेस हाईकमान इस घटना से नाराज दिखा. कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने स्पष्ट कहा कि यह पार्टी का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल नहीं था. पार्टी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है.
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी कहा कि ऐसे कार्यक्रम बिना शीर्ष नेतृत्व की अनुमति के नहीं हो सकते. BSP की ओर से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई. BSP के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने कहा कि उन्हें इस दौरे की कोई जानकारी नहीं है.
अखिलेश का गठबंधन का ऐलान, कांग्रेस की मुश्किल बढ़ी?
इस घटनाक्रम के कुछ घंटे पहले ही समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने साफ संकेत दिया था कि 2027 के UP चुनाव में उनका कांग्रेस के साथ गठबंधन जारी रहेगा. अखिलेश ने कहा, “गठबंधन में सीटों का नहीं, जीत का फॉर्मूला काम करेगा.”
ऐसे में कांग्रेस नेताओं का मायावती से अनाधिकारिक संपर्क की कोशिश को सियासी गलियारों में कई अर्थों में देखा जा रहा है. कुछ इसे BSP के साथ वैकल्पिक रास्ता तलाशने की कोशिश मान रहे हैं, तो कुछ इसे आंतरिक समन्वय की कमी का उदाहरण बता रहे हैं.
मायावती लंबे समय से कांग्रेस और सपा दोनों से दूरी बनाए हुए हैं और अपनी पार्टी को स्वतंत्र रूप से लड़ाने पर जोर देती रही हैं. ऐसे में यह घटना 2027 के UP चुनावी समीकरणों को लेकर नई अटकलों को जन्म दे रही है.