लखनऊ : आरक्षण और मुस्लिम तुष्टिकरण के मुद्दे पर सियासी बयानबाजी उस समय और तेज हो गई, जब उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश पर तीखा हमला बोला. संजय निषाद ने सीधे तौर पर मुगलों के शासन और धर्म आधारित आरक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि मुगलों द्वारा लाए गए धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता. उन्होंने दावा किया कि संविधान सभा ने भी धर्म के आधार पर आरक्षण देने का विरोध किया था और बाबा साहेब अंबेडकर ने भी ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया था.
संजय निषाद ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन पिछड़ों के अधिकारों को कमजोर कर मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की राजनीति सिर्फ तुष्टिकरण पर आधारित है और इसी वजह से पिछड़ी जातियों का हक छीना जा रहा है. निषाद ने कहा कि पीडीए की राजनीति का असली चेहरा सामने आ गया है. पिछड़ों का हिस्सा काटकर मुसलमानों को देने की कोशिश हो रही है.
उन्होंने पूर्व में गठित जस्टिस रंगनाथ मिश्र आयोग का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने ओबीसी आरक्षण में मुस्लिम समुदाय को शामिल करने की कोशिश की थी. साथ ही उन्होंने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां मुस्लिम जातियों को ओबीसी सूची में शामिल कर पारंपरिक पिछड़ी जातियों के अधिकारों पर डकैती डाली गई. पश्चिम बंगाल की राजनीति का जिक्र करते हुए निषाद ने कहा कि वहां की जनता अब इस राजनीति को समझ चुकी है.
उन्होंने दावा किया कि जिस तरह बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ माहौल बना, उसी तरह उत्तर प्रदेश में भी समाजवादी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है. उन्होंने कहा, अगर सपा का यही रवैया रहा तो बंगाल की तरह यूपी में भी उसका सूपड़ा साफ हो जाएगा. संजय निषाद ने इस दौरान पूर्व सांसद फूलन का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्होंने आरक्षण और किसानों के हक की बात उठाई थी, तब उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया था. निषाद ने दावा किया कि एनडीए सरकार पिछड़ी और वंचित जातियों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.