उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में सत्ता संभालते ही अपराध और माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया था। सरकार का दावा है कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई, जिससे कानून व्यवस्था मजबूत हुई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते नौ साल में प्रदेश में पुलिस और अपराधियों के बीच कुल 17,043 एनकाउंटर हुए। इन कार्रवाइयों में 289 अपराधी मारे गए, जबकि 34,253 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 11,834 अपराधी घायल हुए। सरकार इसे अपनी “जीरो टॉलरेंस” नीति का नतीजा बता रही है।
आंकड़ों के अनुसार, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान 18 पुलिसकर्मी शहीद हुए और 1,852 पुलिसकर्मी घायल भी हुए। यूपी पुलिस का कहना है कि लगातार दबाव और कार्रवाई के कारण संगठित अपराध, गैंगवार और माफिया नेटवर्क कमजोर पड़े हैं।
मेरठ जोन एनकाउंटर मामलों में सबसे आगे रहा, जहां 4,813 मुठभेड़ दर्ज की गईं। यहां 8,921 अपराधियों की गिरफ्तारी हुई और 97 अपराधी मारे गए। वहीं वाराणसी जोन में 1,292 मुठभेड़ में 2,426 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
योगी सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि सख्त कानून व्यवस्था और अपराधियों पर कार्रवाई की वजह से उत्तर प्रदेश में निवेश और व्यापार का माहौल बेहतर हुआ है। हालांकि विपक्ष समय-समय पर एनकाउंटर नीति और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाता रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई मंचों से यह कह चुके हैं कि कानून तोड़ने वालों में पुलिस और कानून का डर होना जरूरी है, तभी अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।