कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सतह पर आती दिख रही है. एक तरफ फलता सीट पर टीएमसी उम्मीदवार की नाम वापसी और अभिषेक बनर्जी को नगर निगम का नोटिस चर्चा में है, तो दूसरी तरफ पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार को केंद्र सरकार द्वारा Y कैटेगरी की सुरक्षा दिए जाने से सियासी गलियारों में नई हलचल तेज हो गई है. ऐसे समय में जब कई टीएमसी नेताओं की सुरक्षा घटाए जाने की खबरें सामने आ रही थीं, उसी बीच काकोली घोष को सीआईएसएफ जवानों की सुरक्षा मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है.
66 वर्षीय काकोली घोष दस्तीदार लंबे समय से टीएमसी का बड़ा चेहरा रही हैं. वह पार्टी की महिला शाखा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं, लेकिन 2025 में उन्हें पार्टी के मुख्य सचेतक पद से हटाया जाना राजनीतिक संकेत माना गया था. इसके बाद उनके बेटे की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी पार्टी के भीतर नाराजगी की खबरें सामने आई थीं. अब अचानक मिली हाई सिक्योरिटी ने यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या टीएमसी के अंदर सबकुछ सामान्य नहीं है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में 2026 चुनाव से पहले टीएमसी के भीतर गुटबाजी और शक्ति संतुलन की लड़ाई तेज होती जा रही है. काकोली घोष को मिली सुरक्षा को सिर्फ सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है. सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या आने वाले दिनों में टीएमसी में और बड़े चेहरे खुलकर सामने आ सकते हैं.