नई दिल्ली: प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के पवित्र अवसर पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए विवाद ने पूरे देश में हलचल मचा दी है. यह घटना हिंदू समाज की भावनाओं को गहराई से झकझोर रही है, जहां आस्था और परंपरा पर सवाल खड़े हो गए हैं.
- विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख नेता डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि संगम जैसी पवित्र जगह पर स्नान की परंपरा को लेकर उठा विवाद बेहद पीड़ादायक है. उन्होंने इसे हिंदू समाज के लिए अपमानजनक बताते हुए सभी हिंदुओं से एकजुट होकर अपनी आस्था की रक्षा करने का आह्वान किया.
- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले को राजनीतिक रंग देने से इनकार किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है और इसे राजनीति से दूर रखना चाहिए. मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि जल्द ही यह विवाद सुलझ जाएगा, क्योंकि सरकार अपनी ओर से प्रयासरत है.
- भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि यह देश ऋषियों और किसानों का है, जहां संतों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. टिकैत ने विशेष रूप से उस वीडियो का जिक्र किया जिसमें शंकराचार्य के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार हुआ, जैसे चोटी पकड़कर खींचना, जिसे उन्होंने बेहद निंदनीय करार दिया. उनका कहना था कि पुलिस को चाहिए था कि सम्मानपूर्वक उन्हें स्नान करवाती, न कि रोककर अपमानित करती. त्रिवेणी संगम जैसे पवित्र स्थल पर ऐसा व्यवहार कतई उचित नहीं था.
यह पूरा मामला शुरू हुआ जब शंकराचार्य अपने शिष्यों के साथ रथ पर सवार होकर संगम स्नान के लिए गए, लेकिन भीड़ और नियमों के कारण प्रशासन ने उन्हें रोका. इससे नाराजगी बढ़ी, झड़प हुई और विवाद राजनीतिक-धार्मिक स्तर पर फैल गया. उधर हरिद्वार की हरकी पैड़ी में संतों ने शंकराचार्य के समर्थन में प्रदर्शन किया.
CM Dhami
Praveen Togadia
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Shankaracharya