नई दिल्ली: महाकुंभ संगम में पानी के दूषित होने की चिंताओं के बीच यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की मल बैक्टीरिया की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है और इसे धार्मिक आयोजन को बदनाम करने का प्रयास बताया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि नदी का पानी पवित्र स्नान के लिए और पीने के लिए बिल्कुल उपयुक्त है. साथ ही सीएम योगी ने महाकुंभ आयोजन को और सुविधाजनक बनाने के लिए राज्य की प्रतिबद्धता दोहराई है. CPCB की रिपोर्ट पर सीएम योगी ने कहा कि यह आयोजन किसी पार्टी या सरकार द्वारा आयोजित नहीं किया गया है, यह समाज का है. हम केवल सुविधाकर्ता हैं.
सीएम योगी ने कहा कि उत्सव के अभी सात दिन शेष हैं और आज दोपहर तक संगम में 56 करोड़ 26 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाई है. बता दें कि सीपीसीबी के द्वारा एनजीटी को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा है कि गंगा में कोलीफॉर्म का स्तर 700,000 एमपीएन/100 पाई गई और यमुना में 330000 एमपीएन/100 मिली तक जा चुक है, जो स्नान करने के लिए निर्धारित सीमा से कहीं अधीक है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि धार्मिक उत्सव में अधिक तीर्थयात्रियों के आने और नदी में डुबकी लगाने से पानी में प्रदूषण की मात्रा और बढ़ेगी. रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि विभिन्न अवसरों पर नदी के पानी की गुणवत्ता जांची गई थी. जिसमें पाया गया कि जहां-जहां श्रद्धालु स्नान करते हैं, वहां के पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं थी. दावा किया गया है कि प्रयागराज में महाकुंभ मेले के दौरान बड़ी संख्या में लोग नदी में स्नान करते हैं, जिसके कारण Faecal Coliform की मात्रा बढ़ी है.
इसी बीच एनजीटी ने यूपी सरकार के अधिकारियों को तलब किया है और कहा है कि इस तरह के प्रदूषण से जलजनित बीमारियों सहित गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकते हैं. साथ ही एनजीटी ने यूपीपीसीबी को अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का भी आदेश दिया है. बोर्ड के सदस्य सचिव और अन्य राज्य अधिकारियों को 19 फरवरी को वर्चुअली पेश होने के लिए भी तलब किया.