नई दिल्ली: प्रयागराज में महाकुंभ स्नान को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को चेतावनी जारी की है. CPCB ने NGT को सूचित किया है कि महाकुंभ में जहां श्रद्धालु स्नान करते हैं वहां के पानी में मल कोलीफॉर्म (Faecal Coliform) का स्तर चिंताजनक है. CPCB ने चेतावनी दी है कि वहां के पानी में स्नान करने से श्रद्धालुयों को स्कनी संबंधित गंभीर बीमारी हो सकते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि धार्मिक उत्सव में अधिक तीर्थयात्रियों के आने और नदी में डुबकी लगाने से पानी में प्रदूषण की मात्रा और बढ़ेगी. रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि विभिन्न अवसरों पर नदी के पानी की गुणवत्ता जांची गई थी. जिसमें पाया गया कि जहां-जहां श्रद्धालु स्नान करते हैं, वहां के पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं थी. दावा किया गया है कि प्रयागराज में महाकुंभ मेले के दौरान बड़ी संख्या में लोग नदी में स्नान करते हैं, जिसके कारण Faecal Coliform की मात्रा बढ़ी है.
फेकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया कितना खरनाक
दावा किया जाता है कि कोलीफॉर्म बैक्टीरिया गर्म खून वाले जानवरों और मनुष्यों की आंतों में रहते हैं. जल अनुसंधान केंद्र की रिपोर्ट से पता चलता है कि फेकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया इंसान या पशु अपशिष्ट की गंदगी से जुड़ा होता है. हालांकि यह हानिकारक नहीं हैं, लेकिन रोगजनक बैक्टीरिया और वायरस के संपर्क में आकर खतरनाक हो जता है, जो चिंतित करने वाला है. यानी ऐसे पानी में नहाने से लोगों को स्कीन संबंधित बीमारियां हो सकती है.
दावा कि जाता है कि जब लोग ऐसे पानी में नहाते हैं तो बुखार, मतली या पेट में ऐंठन हो सकते हैं. जल अनुसंधान केंद्र के अनुसार, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बीमार करने वाला यह कारक मुंह, नाक और कान के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाता है.
दावा किया जा रहा है कि इससे हेपेटाइटिस, कान में संक्रमण, टाइफाइड, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और पेचिश जैसी बीमारी भी हो सकती है. जबकि कोलीफॉर्म युक्त पानी को उबालकर या क्लोरीन से उपचारित करके संक्रमण से बचा जा सकता है. साथ ही नहाने के बाद साबुन से अच्छी तरह खुद को धोकर भी इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है.