नई दिल्ली: कांग्रेस सूत्रों ने यह जानकारी दी है कि सरकार ने अकबर रोड स्थित अपने दफ्तर को शनिवार तक खाली करने को कहा है. उन्होंने कहा कि अकबर रोड का यह बंगला पिछले 48 साल से कांग्रेस का मुख्यालय रहा है. पिछले साल विपक्षी पार्टी ने कोटला मार्ग पर अपना नया मुख्यालय इंदिरा भवन का उद्घाटन किया था. लेकिन अकबर रोड परिसर अभी तक खाली नहीं किया गया है और पार्टी की गतिविधियां वहां जारी हैं.
कांग्रेस पार्टी को 5, रायसीना रोड स्थित भारतीय युवा कांग्रेस के दफ्तर को भी खाली करने को कहा गया है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस इस मामले में कुछ राहत पाने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है. जब सोनिया गांधी ने पिछले साल कांग्रेस का नया मुख्यालय उद्घाटित किया था, तब कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा था कि 24, अकबर रोड वाले दफ्तर के साथ उनका भावनात्मक लगाव बहुत गहरा है.
अकबर रोड दफ्तर की दीवारें इतिहास से सराबोर हैं. राज काल के दौरान यह बंगला वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो की कार्यकारी परिषद के सदस्य सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल का आवास हुआ करता था. 1960 के दशक की शुरुआत में यह बंगला म्यांमार की भारत में राजदूत डॉ. खिन क्यी का निवास था. डॉ. खिन क्यी की बेटी आंग सान सू की, जो बाद में नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली थीं, उन्होंने कई साल इसी घर में बिताए थे. लेकिन इस बंगले का सबसे गौरवपूर्ण अध्याय 1970 के दशक के अंत में शुरू हुआ. 1977 के चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी में विभाजन हो गया.
इंदिरा गांधी ने अलग गुट का नेतृत्व किया और उन्हें काम करने के लिए जगह की जरूरत थी. राज्यसभा सांसद जी. वेंकटस्वामी, जो इंदिरा गांधी के वफादार थे, ने अपना अकबर रोड बंगला पार्टी को दे दिया. इसी बंगले ने कांग्रेस की भारी वापसी को देखा. यह बंगला राजीव गांधी, पी.वी. नरसिम्हा राव और फिर डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री काल के दौरान कांग्रेस का मुख्यालय बना रहा. समय के साथ बंगले का विस्तार भी किया गया, जब तक कांग्रेस को नया पता नहीं मिल गया.