नई दिल्ली: इंटरनेट पर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर अक्सर चर्चाओं और विवादों में रहने वाले यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ कानूनी शिकंजा और सख्त हो गया है। एक तरफ दिल्ली की अदालत ने 2018 के एक आपराधिक मानहानि मामले में उनके खिलाफ जमानती वारंट (Bailable Warrant) जारी कर दिया है, तो दूसरी तरफ उनकी गैर-मौजूदगी और विदेश में रहने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब कोर्ट का समन तामील कराने के लिए प्रोसेस सर्वर उनके पते पर पहुंचा, तो वहां ताला लटका मिला।
यह मामला बीजेपी आईटी सेल से जुड़े विकास पांडे द्वारा दायर शिकायत से संबंधित है, जिसमें राठी पर अपने यूट्यूब वीडियो के जरिए छवि खराब करने और गंभीर मानहानि करने का आरोप लगाया गया है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट राहुल जैन की अदालत ने मामले की गंभीरता और समन तामील न हो पाने की रिपोर्ट के बाद यह सख्त रुख अपनाया।
विदेश में डेरा, घर पर ताला
अदालत में शिकायतकर्ता के वकील समक्ष शर्मा ने बताया कि ध्रुव राठी का अधिकांश समय भारत से बाहर (ऑस्ट्रिया/यूरोप) बीतता है और वे नियमित रूप से देश में मौजूद नहीं रहते। कोर्ट को यह भी अवगत कराया गया कि शिकायतकर्ता पक्ष पिछले कई सालों से उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत समन पहुंचाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन कभी घर बंद मिलने तो कभी आरोपी के देश से बाहर होने के चलते प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी।
अब आगे क्या हो सकता है कानूनी एक्शन?
अदालत द्वारा जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद कानूनी जानकारों के मुताबिक यह सवाल बड़ा हो गया है कि यदि आरोपी देश में मौजूद नहीं है या विदेश यात्रा पर है, तो कार्रवाई कैसे आगे बढ़ेगी:
समन और वारंट की तामीली: यदि आरोपी देश के बाहर है, तो दूतावास या गृह मंत्रालय (MHA) के जरिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाओं के तहत नोटिस/वारंट तामील कराने का प्रावधान होता है।
गैर-जमानती वारंट (NBW): कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 31 अक्टूबर की तारीख तय की है। यदि तय तारीख तक भी पेशी सुनिश्चित नहीं होती है या वारंट पर संज्ञान नहीं लिया जाता, तो अदालत गैर-जमानती वारंट जारी करने पर विचार कर सकती है।
लुकआउट सर्कुलर (LOC): यदि आरोपी लगातार कानूनी प्रक्रिया से बचता नजर आता है, तो जांच एजेंसियां या अदालत के निर्देश पर हवाई अड्डों पर लुकआउट नोटिस जारी किया जा सकता है, जिससे भारत लौटते ही कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।