नई दिल्ली: लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति जताना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन जब सार्वजनिक व्यवस्था और शांति भंग होने की आशंका पैदा होती है, तो कानून सुरक्षा एजेंसियों को एहतियाती कदम उठाने का अधिकार भी देता है। हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस द्वारा दोबारा हिरासत में लिए जाने के बाद यह कानूनी बहस तेज हो गई है कि क्या पहले से 'पीस बॉन्ड' (Peace Bond) भरने के बावजूद किसी व्यक्ति को दोबारा एहतियातन पकड़ा जा सकता है?
यह पूरा मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की शक्तियों और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन पर रोशनी डालता है।
11 अक्टूबर को अभिजीत दिपके ने कानून के तहत एक साल तक शांति और सदाचार बनाए रखने के लिए 50,000 रुपये का बॉन्ड भरा था। इसके बावजूद, 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने से ठीक पहले पुलिस ने उन्हें फिर हिरासत में ले लिया।
पुलिस ने उनके खिलाफ BNSS की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। इसके बाद 17 अक्टूबर को नया शांति बॉन्ड जमा करने की शर्त पर उन्हें रिहा किया गया।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170 पुलिस को संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) को रोकने के लिए बिना वारंट गिरफ्तारी की असाधारण शक्ति देती है। हालांकि, यह अधिकार असीमित नहीं है:
पर्याप्त आधार जरूरी: पुलिस अधिकारी के पास ठोस और पुख्ता वजह होनी चाहिए कि संबंधित व्यक्ति कोई गंभीर अपराध करने वाला है।
अंतिम विकल्प: गिरफ्तारी तभी की जा सकती है जब उस अपराध को रोकने का कोई अन्य विकल्प न बचा हो।
समय सीमा: इस धारा के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक समय तक पुलिस अपनी कस्टडी में नहीं रख सकती; तय समय के भीतर उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य होता है।
BNSS, 2023 की धारा 126 कार्यकारी मजिस्ट्रेट को यह अधिकार देती है कि यदि उन्हें सूचना मिले कि किसी व्यक्ति से शांति भंग होने या सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने का अंदेशा है, तो वे उस व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकते हैं।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद मजिस्ट्रेट संबंधित व्यक्ति से अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए शांति बनाए रखने का मुचलका (Bond) भरवा सकते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार शांति बॉन्ड (Peace Bond) भर देने का मतलब यह कतई नहीं है कि व्यक्ति को भविष्य की किसी भी कानूनी कार्रवाई से स्थायी छूट मिल गई है:
नई परिस्थितियों में नया एक्शन: यदि किसी नई तारीख या कार्यक्रम में दोबारा संज्ञेय अपराध होने की आशंका बनती है और धारा 170 की अनिवार्य शर्तें पूरी होती हैं, तो पुलिस स्वतंत्र रूप से दोबारा एहतियाती गिरफ्तारी कर सकती है।
शर्तों का उल्लंघन: यदि पहले से लागू बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो BNSS की धारा 141 के तहत बॉन्ड जब्त करने और अन्य कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
ताजा बॉन्ड की मांग: शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए मजिस्ट्रेट परिस्थितियों का आकलन कर नया या अतिरिक्त बॉन्ड भरने का आदेश भी दे सकते हैं।