'मुझ पर 45 केस, फिर वोट चोरी पर मुकदमा क्यों नहीं?'— गोवा में राहुल गांधी का अजीबोगरीब तर्क, फिर संवैधानिक संस्थाओं पर मढ़ा हार का ठीकरा!

Rahul Jadaun 18 Oct 2026 05:37 PM 1 Mins
'मुझ पर 45 केस, फिर वोट चोरी पर मुकदमा क्यों नहीं?'— गोवा में राहुल गांधी का अजीबोगरीब तर्क, फिर संवैधानिक संस्थाओं पर मढ़ा हार का ठीकरा!

मडगांव (गोवा): चुनावी नतीजों और लगातार मिल रही हार से उबरने के बजाय कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर चुनावी व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने में जुट गए हैं। गोवा के मडगांव में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने 'वोट चोरी' का पुराना राग अलापा और अपनी ही कानूनी मुश्किलों को ढाल बनाकर एक अजीबोगरीब तर्क पेश किया।

राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके खिलाफ देश भर में 45 से अधिक मानहानि के मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन जब वे 'वोट चोरी' का आरोप लगाते हैं, तो उन पर कोई केस दर्ज नहीं होता। अपने इस बेतुके तर्क के पीछे की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में अदालत की चौखट पर कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई, तो व्यवस्था से जुड़े लोगों को ही सवालों का सामना करना पड़ जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सबूत पेश करने के बजाय केवल बयानों के जरिए चुनावी शुचिता पर सवाल उठाना अब कांग्रेस की पुरानी रणनीति बन चुकी है।

'गोय राखण यात्रा' में की दो किलोमीटर की पदयात्रा

रविवार को राहुल गांधी कांग्रेस की 'गोय राखण यात्रा' में शामिल हुए। मडगांव की सड़कों पर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ उन्होंने करीब दो किलोमीटर की पदयात्रा की। पदयात्रा के बाद आयोजित सभा में उन्होंने सीधा हमला देश के शीर्ष नेतृत्व और चुनाव आयोग पर बोला।

पीएम मोदी, गृह मंत्री और चुनाव आयोग पर साधा निशाना

अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए उन पर 'वोट चोरी' में शामिल होने के गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, हर बार की तरह इस बार भी उनके पास इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य या कानूनी दस्तावेज मौजूद नहीं थे।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनादेश का सम्मान करने के बजाय बार-बार चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर कीचड़ उछालने को लेकर सत्ता पक्ष पहले भी राहुल गांधी को आड़े हाथों लेता रहा है। गोवा की धरती से भी उन्होंने जनता के मुद्दों पर बात करने के बजाय वही पुराना घिसा-पिटा नैरेटिव दोहराया, जिससे यह साफ झलकता है कि कांग्रेस चुनावी मैदान में मात खाने के बाद अब व्यवस्था को ही बदनाम करने के रास्ते पर चल रही है।

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