नई दिल्ली: साइक्लोन सेन्यार के कमजोर पड़ने की राहत अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि बंगाल की खाड़ी में एक नया मौसमी संकट पैदा हो गया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका तट के निकट बने निम्न दबाव का क्षेत्र अब डीप डिप्रेशन में तब्दील हो चुका है. अगले 12 घंटों में यह चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है, जिसे 'साइक्लोन डिटवा' नाम दिया जाएगा.
IMD के अनुसार, यह मौसमी प्रणाली उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में बढ़ रही है. वर्तमान में यह श्रीलंका के पोट्टुविल के पूर्व में स्थित है, जो बैट्टिकलोआ से करीब 90 किमी दक्षिण-दक्षिणपूर्व, हम्बनटोटा से 120 किमी उत्तर-पूर्व, त्रिंकोमाली से 200 किमी दक्षिण-पूर्व, पुडुचेरी से 610 किमी दक्षिण-दक्षिणपूर्व और चेन्नई से 700 किमी दक्षिण-दक्षिणपूर्व दूर है.
अगले 24 घंटों तक दक्षिण-पूर्व श्रीलंका और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में घूमते हुए मजबूत होगा. 29 नवंबर तक तमिलनाडु-पुडुचेरी तट के पास पहुंचेगा और 30 नवंबर की सुबह उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी तथा दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों से टकरा सकता है. तूफान की वजह से तमिलनाडु में 27-30 नवंबर तक भारी से बहुत भारी वर्षा, कुछ जगहों पर अति भारी (100 मिमी से ज्यादा). दक्षिण आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में 29-30 नवंबर को तीव्र बारिश हो सकती है.
इस दौरान 80-90 किमी/घंटा और कुछ इलाकों में 100 किमी/घंटा तक की रफ्तार से वहाएं चल सकती है. समुद्र में ऊंची लहरें और तटीय बाढ़ का खतरा है. IMD ने चेन्नई, नागपट्टिनम, तिरुवल्लुर, तंजावुर समेत कई जिलों में 27-29 नवंबर के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किए हैं. इधर, मलक्का जलडमरू और उत्तर-पूर्वी इंडोनेशिया पर सक्रिय साइक्लोन सेन्यार अब डीप डिप्रेशन में कमजोर हो चुका है. यह पूर्व दिशा में खिसक रहा है और गुरुवार शाम तक पूरी तरह समाप्त हो जाएगा.
बावजूद इसके, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में 29 नवंबर तक कहीं-कहीं भारी वर्षा जारी रहेगी. तटीय राज्यों के प्रशासन ने मछुआरों को 30 नवंबर तक समुद्र से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है. स्थानीय निवासियों से अपील की गई है कि वे IMD के अपडेट्स पर नजर रखें. NDRF और राज्य आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट पर हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में इतने कम अंतराल पर दो तूफान दुर्लभ हैं, इसलिए सतर्कता बरतना जरूरी है. मौसम विभाग ने कहा, "डिटवा का प्रभाव श्रीलंका को भी छू सकता है. सभी पक्ष तैयार रहें." यात्रा योजनाओं में बदलाव करें और सुरक्षित रहें!