Datia Bypoll Election Result : दतिया की हार सिर्फ 6,016 वोटों की हार नहीं है, बल्कि यह भाजपा की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति पर बड़ा सवाल भी छोड़ गई है. संगठन के पुराने चेहरे आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारने के बावजूद भाजपा कांग्रेस से सीट नहीं छीन सकी.
इस हार के पीछे सबसे बड़ा कारण यादव वोटों का बंटवारा माना जा रहा है. आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के उम्मीदवार दामोदर यादव ने करीब 22,527 वोट हासिल किए. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन वोटों का बड़ा हिस्सा उस सामाजिक आधार से आया, जिस पर भाजपा भी दावा कर रही थी. यदि यह वोट भाजपा की ओर आते, तो मुकाबले की तस्वीर अलग हो सकती थी.
दूसरा बड़ा सवाल मुख्यमंत्री मोहन यादव की राजनीति पर खड़ा हुआ है. भाजपा ने मध्य प्रदेश में ओबीसी और विशेष रूप से यादव समाज को साधने के लिए मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया था, लेकिन दतिया उपचुनाव में यादव समुदाय का एक बड़ा वर्ग भाजपा के बजाय दामोदर यादव के साथ दिखाई दिया, इससे यह संदेश गया कि केवल जातीय प्रतिनिधित्व देना हर सीट पर वोटों में तब्दील नहीं होता.
दतिया का स्थानीय समीकरण भी भाजपा के खिलाफ गया. टिकट चयन को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष पहले से था और नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा. ऐसे माहौल में कांग्रेस ने अपना परंपरागत वोट बैंक संभाले रखा, जबकि भाजपा का वोट आधार कई हिस्सों में बंट गया.
कुल मिलाकर दतिया का संदेश साफ है कि सिर्फ संगठन, चेहरा या जातीय समीकरण पर्याप्त नहीं हैं. जब स्थानीय नाराजगी, टिकट विवाद और तीसरी पार्टी का प्रभाव एक साथ जुड़ जाए, तो सत्ता पक्ष को भी हार का सामना करना पड़ सकता है. दतिया उपचुनाव ने भाजपा के लिए यही सबसे बड़ा राजनीतिक सबक छोड़ दिया.