लिव-इन रिलेशनशिप शादी जैसा ही! माता-पिता नहीं दे सकते दखल, दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रेमी जोड़े को दी सुरक्षा

Amanat Ansari 20 Aug 2026 04:48 PM 1 Mins
लिव-इन रिलेशनशिप शादी जैसा ही! माता-पिता नहीं दे सकते दखल, दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रेमी जोड़े को दी सुरक्षा

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा है कि आपसी सहमति से बालिगों का लिव-इन रिलेशनशिप शादी के जैसा ही है. न तो माता-पिता और न ही दोस्त उनकी पसंद में दखलअंदाजी कर सकते हैं या उनकी जान को खतरा पहुंचा सकते हैं.

जस्टिस सौरभ बनर्जी ने लड़की के घरवालों की तरफ से मिल रही धमकियों पर ध्यान देते हुए प्रेमी जोड़े को पुलिस सुरक्षा मुहैया करवाने के निर्देश जारी किए. कोर्ट ने कहा कि सहमति से साथ रह रहे जोड़े को किसी की भी दखलअंदाजी के बिना अपनी पसंद के साथी को चुनने और उसके साथ रहने का पूरा अधिकार है.

जज ने 13 अगस्त को आदेश जारी करते हुए कहा कि बालिगों के बीच आपसी सहमति से होने वाली शादियों को जाति, पंथ, रंग, धर्म या आस्था से अलग मान्यता दी जाती है. ‘सामाजिक सोच और पुरानी मान्यताओं’ के नाम पर संविधान से मिले मौलिक अधिकारों को सीमित करना किसी व्यक्ति से उसकी निजी पहचान को छीनने जैसा है.

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि याचिकाकर्ताओं ने अपनी मर्जी, आपसी सहमति और पूरी जिम्मेदारी के साथ एक-दूसरे के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का फैसला लिया है. ऐसे में कोई भी चाहे माता-पिता, रिश्तेदार या दोस्त—यह अधिकार नहीं रखते कि वे रुकावट डालें, दखलअंदाजी करें या उनकी जिंदगी व आजादी को खतरे में डालें.

कोर्ट ने आगे कहा, “याचिकाकर्ता लिव-इन रिलेशनशिप में हैं और कानूनी तौर पर शादीशुदा नहीं हैं, मगर फिर भी आपसी सहमति से साथ रह रहे बालिगों का लिव-इन रिलेशनशिप शादी जैसा ही है.” याचिकाकर्ता जोड़े ने कोर्ट को बताया कि उनकी उम्र करीब 30 साल है.

दोनों कुछ समय से साथ रह रहे हैं और एक-दूसरे से शादी भी करना चाहते हैं. हालांकि लड़की के पिता और भाई इस रिश्ते से खुश नहीं हैं और लगातार धमकियां दे रहे हैं. जोड़े ने स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि शादी न होने के बावजूद बालिगों को अपनी मर्जी से लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का पूरा अधिकार है.

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