DM ने बच्चों की ली क्लास, फर्श पर बैठकर सुना पाठ, दिल जीत लेगा वीडियो

Global Bharat 13 Aug 2026 10:51: AM 2 Mins
DM ने बच्चों की ली क्लास, फर्श पर बैठकर सुना पाठ, दिल जीत लेगा वीडियो

सैफई : पूर्व सांसद और बीजेपी नेता ब्रजभूषण शरण सिंह ने समाजवादी पार्टी के संस्थापक रहे मुलायम सिंह यादव के परिवार और सैफई की राजनीतिक संस्कृति की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि वे अपने दोनों बेटों से अक्सर परिवार के संस्कार सीखने की बात कहते थे और उन्हें सैफई जाकर रहने की सलाह देते थे.

ब्रजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने बड़े बेटे प्रतीक भूषण से भी कहा था कि वह नेताजी मुलायम सिंह यादव के सैफई स्थित घर में 10-15 दिन रहकर आएं. उनका मकसद यह था कि बेटा वहां जाकर देखे कि परिवार के संस्कार और लोगों के साथ व्यवहार कैसा होता है. उन्होंने कहा कि राजनीति में परिवारवाद को लेकर चाहे जितने आरोप लगाए जाएं, लेकिन मुलायम सिंह यादव के परिवार में मिलने वाले संस्कारों को भी समझने की जरूरत है. 

ब्रजभूषण ने कहा कि वह हर राजनीतिक व्यक्ति से कहना चाहते हैं कि अगर संस्कार देखने हैं तो सैफई परिवार में जाकर देखिए. ब्रजभूषण के मुताबिक, सैफई परिवार में मिलने वाला हर व्यक्ति हाथ जोड़कर नमस्ते करता है और सबसे पहले यही पूछता है कि आपने नाश्ता किया है या नहीं. उन्होंने इसे परिवार की परंपरा और संस्कार से जोड़ते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन लोगों के सम्मान और व्यवहार की संस्कृति अलग विषय है.

ब्रजभूषण का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूपी की राजनीति में परिवारवाद को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच लंबे समय से सियासी बहस चलती रही है. उनके बयान ने इस बहस में एक अलग पहलू जोड़ दिया है. उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि परिवारवाद का आरोप लगाने वालों को भी सैफई परिवार के संस्कारों से सीख लेनी चाहिए.

देवरिया : उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी का सरकारी प्राइमरी स्कूल का दौरा चर्चा में है. स्कूल में निरीक्षण के दौरान बच्चों की संख्या बहुत अधिक नहीं मिली, लेकिन परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक पाई गई. DM ने स्कूल की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ बच्चों से सीधे संवाद भी किया और उनकी पढ़ाई को समझने की कोशिश की.

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बच्चों से उनके पाठ्यक्रम, पढ़ाई और स्कूल में मिलने वाली सुविधाओं को लेकर बातचीत की, इसके बाद उन्होंने अचानक शिक्षक की भूमिका भी निभाई। DM हुल्गी ने बच्चों की क्लास ली और उनके सिलेबस के अलग-अलग अध्याय पढ़ाए. इस दौरान उन्होंने बच्चों से सवाल पूछकर उनकी समझ को परखा और पढ़ाई के दौरान आने वाली दिक्कतों को जानने का प्रयास किया.

स्कूल में जहां फर्नीचर की व्यवस्था नहीं थी, वहां जिलाधिकारी ने औपचारिकता से दूरी बनाते हुए फर्श पर बैठकर छात्रा से उसका पाठ सुना. उन्होंने छात्रा के जवाब और पढ़ने के तरीके को ध्यान से देखा और जहां सुधार की जरूरत महसूस हुई, वहां उसे समझाया. DM का यह अंदाज बच्चों के लिए भी अलग अनुभव रहा.

जिलाधिकारी का यह दौरा सिर्फ निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने बच्चों के साथ शिक्षक की तरह समय बिताकर शिक्षा की वास्तविक स्थिति को करीब से समझने की कोशिश की. सरकारी स्कूलों में अधिकारियों के इस तरह सीधे संवाद करने से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ सकता है और शिक्षकों को भी अपनी जिम्मेदारी के प्रति प्रेरणा मिल सकती है.

Gen-Z और Gen-Alpha के तेजी से बढ़ते प्रभाव वाले दौर में बच्चों की बदलती जरूरतों को समझना जरूरी है. ऐसे में DM मधुसूदन हुल्गी का यह प्रयास प्रशासन और समाज के बीच बेहतर जुड़ाव की मिसाल माना जा सकता है.

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