ध्रुव राठी का चौंकाने वाला खुलासा: ‘घर में घुसकर मां को धक्का दिया, वकील से बात नहीं करने दी, चप्पल भी नहीं पहनने दी’

Amanat Ansari 11 Oct 2026 02:14 PM 1 Mins
ध्रुव राठी का चौंकाने वाला खुलासा: ‘घर में घुसकर मां को धक्का दिया, वकील से बात नहीं करने दी, चप्पल भी नहीं पहनने दी’

नई दिल्ली: यूट्यूबर ध्रुव राठी ने गुरुग्राम स्थित अपने घर से हिरासत में लिए जाने की घटना का विस्तार से बयान दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें बेडरूम से जबरन बाहर निकाला, उनके साथ बदसलूकी की और करीब 23 घंटे तक वकील या फोन से बात करने की अनुमति नहीं दी. एक्स पर पोस्ट किए गए वीडियो में राठी ने कहा, “उन्होंने मुझे 22-23 घंटे तक बंद रखा. फोन इस्तेमाल करने या वकील से बात करने नहीं दिया. कहते रहे कि यह गिरफ्तारी या हिरासत नहीं है, छोड़ देंगे. लेकिन मैं इसे किडनैपिंग कहूंगा.”

क्या हुआ घर के अंदर?

राठी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 7 बजे जब वे सो रहे थे, तो लगभग 20 लोग (पुलिसकर्मी और सादे कपड़ों में व्यक्ति) उनके घर में घुस आए. दरवाजा खोलने वाली उनकी मां को धक्का देकर अंदर घुस गए और पूरे घर में फैल गए. फिर बेडरूम में पहुंचकर उन्हें घसीटते हुए सीढ़ियों से नीचे ले गए.

उन्होंने आरोप लगाया, “मुझे समझ में आने से पहले ही बेडरूम से घसीट लिया. अपराधी की तरह सीढ़ियों से नीचे उतारा. पूरे शरीर में चोटें आईं. चप्पल पहनने का भी समय नहीं दिया.” राठी ने बताया कि उनके और माता-पिता के फोन तुरंत जब्त कर लिए गए, ताकि घटना रिकॉर्ड न हो सके. घर के बाहर 50 से ज्यादा कर्मी तैनात थे. उन्हें विभिन्न थानों में ले जाया गया.

नागरिकता और अन्य आरोपों पर सफाई

राठी ने मीडिया में प्रसारित अफवाहों का खंडन करते हुए कहा कि उनके पास भारतीय पासपोर्ट है और वे किसी भी भारतीय नागरिक की तरह अधिकार रखते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मीडिया घरों ने उनकी नागरिकता को लेकर गलत सूचना फैलाई. उन्होंने यह भी कहा कि आगे किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल न होने का कोई अंडरटेकिंग उन्होंने नहीं दिया.

उन्होंने कहा कि अगर वे प्रदर्शन स्थल पर होते और पुलिस हिरासत में लेती तो बात अलग होती. लेकिन घर से जबरन निकालना गलत है. “अगर कोई अधिकारी यूनिफॉर्म में आकर कानूनी प्रावधान बताता और साथ चलने को कहता, तो मैं स्वेच्छा से चला जाता. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.”

राठी ने माता-पिता के साथ भी कथित बदसलूकी का आरोप लगाया और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए “अनौपचारिक इमरजेंसी” करार दिया. यह घटना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शन के दौरान हुई सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा थी. राठी को रविवार सुबह करीब 3 बजे रिहा कर दिया गया था.

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