भोपाल: राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपों ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अब सनसनीखेज फैसला लिया है. उन्होंने ऐलान किया कि वह अयोध्या की अदालत में मुकदमा दायर कर अपने द्वारा दिए गए 1 लाख 11 हजार रुपए का चंदा वापस मांगेंगे.
दिग्विजय सिंह ने कहा, "मैंने राम मंदिर के लिए दो बार चंदा दिया. पहली बार आडवाणी जी की रथ यात्रा के समय और दूसरी बार ट्रस्ट को 1.11 लाख रुपए का चेक देकर. शिवराज सिंह चौहान ने 1 लाख दिए थे, इसलिए मैंने उनसे ज्यादा दिया. लेकिन अब पता चला कि चढ़ावे का पैसा गबन हो रहा था. गड्डियां गायब हो जाती थीं. यह भगवान राम की आस्था पर सीधी चोट है."
दिग्विजय का तीखा हमला
उन्होंने विश्व हिंदू परिषद पर भरोसा न करने की बात कही और सीधे ट्रस्ट को दान दिया. चंपत राय पर आरोप लगाते हुए कहा कि कम वेतन पर कर्मचारी रखे गए और रोजाना 10-20% चंदा गायब हो जाता था. पुलिस पर भरोसा न जताते हुए कहा, "पुलिस बीजेपी के नियंत्रण में है, इसलिए थाने नहीं, सीधे अदालत जाऊंगा." दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपना चंदा ट्रस्ट में जमा कराने की बात भी कही थी और रसीद भी ली थी.
क्या है पूरा मामला?
7 जून को राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे (नकदी, सोना-चांदी) के गबन का मामला सामने आया. UP सरकार ने SIT गठित की, 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया और ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय समेत कुछ सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया. दिग्विजय सिंह का यह बयान राम मंदिर चढ़ावा विवाद को नया मोड़ दे रहा है. उन्होंने साफ कहा कि गबन हुए पैसे को वापस लेकर वे रामालय ट्रस्ट में जमा करेंगे.