'दिमागी नक्सल' पर तेज हुआ सियासी घमासान: चिदंबरम और महबूबा मुफ्ती ने खुद को बताया 'दिमागी नक्सली', किरेन रिजिजू बोले- 'संविधान को न मानने वाले ही हैं नक्सली'

Rahul Jadaun 17 Aug 2026 03:06 PM 1 Mins
'दिमागी नक्सल' पर तेज हुआ सियासी घमासान: चिदंबरम और महबूबा मुफ्ती ने खुद को बताया 'दिमागी नक्सली', किरेन रिजिजू बोले- 'संविधान को न मानने वाले ही हैं नक्सली'

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से 'दिमागी नक्सल' शब्द का उल्लेख किए जाने के बाद देश की सियासत में तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने खुद को 'दिमागी नक्सली' बताकर केंद्र सरकार पर कड़ा तंज कसा। इसके जवाब में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्टीकरण देते हुए विपक्ष पर पलटवार किया और कहा कि 'दिमागी नक्सली' वही लोग हैं जो भारतीय संविधान को नकारते हैं और अलगाववादी ताकतों का समर्थन करते हैं।

किरेन रिजिजू ने दी सफाई: कौन हैं 'दिमागी नक्सली'? विपक्ष के बढ़ते हमलों के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए स्थिति स्पष्ट की। रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूरे विपक्ष को 'दिमागी नक्सल' नहीं कहा है। उन्होंने तीन बिंदुओं के जरिए परिभाषित करते हुए लिखा कि 'दिमागी नक्सली' केवल वही हैं जो:

  1. माओवादियों और हथियारबंद उग्रवादियों की हिंसा का समर्थन करते हैं तथा भारतीय संविधान की मूल भावना को खारिज करते हैं।

  2. अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं और देश की एकता को कमजोर करने वाले प्रावधानों जैसे अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं।

  3. पूर्वोत्तर को शेष भारत से अलग करने के लिए 'चिकन नेक' कॉरिडोर को काटने जैसी अलगाववादी सोच की वकालत करते हैं।

महबूबा मुफ्ती और चिदंबरम का पलटवार केंद्रीय मंत्री की इस व्याख्या पर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर तीखा जवाब दिया। उन्होंने अपने पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद और पीएम मोदी की एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "मैं अनुच्छेद 370 का समर्थन करती हूं। इसलिए मैं एक दिमागी नक्सल हूं।"

वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 'दिमागी नक्सल' दरअसल 'अर्बन नक्सल', 'आंदोलनजीवी' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसी पुरानी बयानबाजी का ही एक नया रूप है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नीतियों पर सवाल उठाने वाले बुद्धिजीवियों, विपक्षी नेताओं और पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए ऐसे नए शब्द गढ़ रही है।

आरजेडी नेता मनोज झा का तंज इस विवाद में आरजेडी सांसद मनोज झा ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री राजनीतिक शब्दावली का विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसा कि अगर 'अर्बन नक्सल' पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री थी, तो 'दिमागी नक्सल' निश्चित रूप से पीएचडी है। स्वतंत्रता दिवस के भाषण से शुरू हुई यह बहस अब संसद से लेकर सोशल मीडिया तक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है।

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