Victory by One Vote: तमिलनाडु के सबसे करीबी चुनावी मुकाबले का दूसरा अध्याय शुरू हो गया है. DMK के पूर्व मंत्री केआर पेरियाकरुप्पन ने तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट पर महज एक वोट से हारने के बाद मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने TVK के MLA सीनिवासा सेथुपति को शपथ लेने या किसी भी विधायी कार्यवाही में भाग लेने से रोकने के लिए अंतरिम रोक लगाने की मांग की है. मद्रास हाईकोर्ट इस याचिका पर रविवार को दुर्लभ विशेष सुनवाई करने जा रहा है.
एक वोट की कहानी ने बढ़ाई सनसनी
तिरुप्पत्तूर के इस एक वोट वाले उलटफेर को और ज्यादा ध्यान तब मिला, जब मस्कट से एक मतदाता ने दावा किया कि वह विजय की पार्टी तमिलग वेट्री कझगम (TVK) के लिए वोट डालने के लिए खासतौर पर तमिलनाडु आया था. तिरुप्पत्तूर (शिवगंगा जिले) के मतदाता मणिकंडन शिवनानथम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह मस्कट से उड़ान भरकर वोट डालने आया और उसे इस बात पर गर्व है. चूंकि जीत का अंतर ठीक एक वोट का था, इसलिए उनकी वोट ने नतीजे को बदलने में अहम भूमिका निभाई हो सकती है. चुनाव आयोग के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, सीनिवासा सेथुपति ने 83,375 वोट हासिल किए और पेरियाकरुप्पन को लोकतंत्र के सबसे छोटे अंतर से हराया.
तमिलनाडु में TVK की धमाकेदार जीत
तिरुप्पत्तूर का यह नतीजा TVK के डेब्यू विधानसभा चुनाव में दिए गए सबसे प्रतीकात्मक झटकों में से एक था. फरवरी 2024 में गठित हुई इस पार्टी ने लगभग 35 प्रतिशत वोट शेयर के साथ तमिलनाडु की राजनीति में तहलका मचा दिया और DMK-AIADMK के लंबे वर्चस्व को तोड़ दिया. सबसे बड़े उलटफेरों में से एक मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की कोलाथुर सीट पर हार थी, जहां उन्होंने TVK के अपेक्षाकृत कम जाने-माने उम्मीदवार वी.एस. बाबू से हार का सामना किया.
10 से ज्यादा मंत्री, जिनमें गीता जीवान और मा. सुब्रमण्यम भी शामिल हैं, TVK की लहर में हार गए. DMK को 59 सीटें मिलीं, जबकि NDA समर्थित AIADMK को 47 सीटें. TVK 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत से सिर्फ थोड़ा पीछे रह गया, जिसके बाद कांग्रेस, IUML, वामपंथी दल, VCK और PMK जैसी छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन की तेज़ गतिविधियां शुरू हो गईं.
विजय ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ
यह कानूनी लड़ाई ऐसे समय में आ रही है जब विजय आज सुबह 10 बजे राज्यपाल की मंजूरी के बाद कांग्रेस, CPI, CPI(M), VCK और IUML के समर्थन से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. TVK ने अपने पहले चुनाव में 108 सीटें जीतीं और गठबंधन समर्थन के साथ कुल 120 विधायकों के समर्थन से बहुमत हासिल कर लिया.
इससे विजय लगभग 60 वर्षों बाद तमिलनाडु के पहले गैर-द्रविड़ मुख्यमंत्री बने हैं. हालांकि, कैबिनेट गठन पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है. सहयोगी दल प्रमुख पदों (खासकर डिप्टी चीफ मिनिस्टर) के लिए मोलभाव कर रहे हैं. सरकारी गठन की प्रक्रिया के दौरान कई दिनों तक रिसॉर्ट पॉलिटिक्स चली.