नई दिल्ली: विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने 30 जनवरी 2025 को दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज (Hansraj College) में एक विशेष संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने 'विकसित भारत' के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया. यह कार्यक्रम युवाओं के समक्ष एक प्रेरणादायक संदेश था, जिसमें डॉ. जयशंकर ने यह बताया कि कैसे आज का भारतीय युवा राष्ट्र की प्रगति में अहम योगदान दे सकता है.
संबोधन की शुरुआत में डॉ. जयशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत का भविष्य सीधे तौर पर इसके युवा वर्ग पर निर्भर करेगा. उन्होंने बताया कि आज की दुनिया में युवा ना केवल अपने परिवार और समाज के लिए, बल्कि अपने देश की प्रगति और समृद्धि के लिए भी जिम्मेदार हैं. "हमारे पास दुनिया का सबसे बड़ा युवा जनसंख्या समूह है, और यह हमें एक अद्वितीय अवसर देता है. युवा अपने प्रयासों से देश की दिशा बदल सकते हैं, और 'विकसित भारत' का सपना साकार कर सकते हैं," उन्होंने कहा.
विदेश मंत्री ने भारत की बढ़ती वैश्विक स्थिति पर भी चर्चा की. उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अपनी शक्ति और प्रभाव को साबित किया है. डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत अब केवल एक आर्थिक शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक, तकनीकी और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी दुनिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. और इस दिशा में युवाओं की भागीदारी अत्यंत जरूरी है.
ईएएम ने तकनीकी क्षेत्र में भारत की प्रगति की बात करते हुए कहा कि यह समय है जब भारतीय युवा नवाचार और अनुसंधान में अपने कौशल को और अधिक धारदार बना सकते हैं. उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे तकनीकी, डिजिटल, और विज्ञान के क्षेत्रों में अपना योगदान दें, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर और भी आगे बढ़ सके. "आपके द्वारा किए गए प्रयासों से ही भारत न केवल एक मजबूत आर्थिक शक्ति बनेगा, बल्कि एक ऐसे राष्ट्र के रूप में उभरेगा, जो दुनिया को नेतृत्व प्रदान करेगा," डॉ. जयशंकर ने कहा.
संबोधन के दौरान, डॉ. जयशंकर ने यह भी बताया कि शिक्षा और रोजगार के अवसरों में सुधार के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. उन्होंने कहा, "शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में हमारे देश में लगातार सुधार हो रहा है, और युवाओं को अब अधिक अवसर मिल रहे हैं. हालांकि, यह भी आवश्यक है कि युवा अपने कौशल को बढ़ाए और बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को तैयार करें." उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे अपनी शिक्षा को केवल एक नौकरी पाने के साधन के रूप में न देखें, बल्कि अपने देश की सेवा के रूप में भी इसे अपनाएं.
डॉ. जयशंकर ने यह भी बताया कि भारत की विदेश नीति में युवाओं का योगदान कैसे बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि जब भारत वैश्विक मामलों में अपनी सशक्त उपस्थिति बनाए रखने के लिए कदम उठा रहा है, तो ऐसे में भारतीय युवा अपने देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेतृत्व दिखा सकते हैं. उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे भारतीय छात्र और युवा विदेशों में भारतीय संस्कृति और विचारधारा को प्रचारित कर रहे हैं, जिससे देश के प्रति एक सकारात्मक छवि बन रही है.
इस कार्यक्रम के दौरान, हंसराज कॉलेज के छात्रों ने विदेश मंत्री से सीधा संवाद किया और विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे. छात्रों ने शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण, और देश की विदेश नीति पर अपने विचार और सवाल प्रस्तुत किए. इस संवाद सत्र ने छात्रों को अपनी बात रखने और सरकार के दृष्टिकोण को समझने का एक अच्छा अवसर प्रदान किया.
कार्यक्रम का समापन करते हुए डॉ. एस जयशंकर ने एक प्रेरणादायक संदेश दिया. उन्होंने कहा, "आप सभी युवा भारतीय राष्ट्र के भविष्य हैं. यह समय है जब आपको अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और उसे निभाना होगा. आप अपनी क्षमता और कड़ी मेहनत से इस देश को ऊंचाईयों तक ले जा सकते हैं." उनका यह संदेश छात्रों के लिए एक नई ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत बन गया.
इस कार्यक्रम में डॉ. जयशंकर ने यह स्पष्ट किया कि 'विकसित भारत' की दिशा में युवाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने यह भी बताया कि युवा अपनी सोच, कार्य और दृष्टिकोण से राष्ट्र की पहचान और भविष्य को आकार देने में सक्षम हैं. यह संबोधन न केवल हंसराज कॉलेज के छात्रों, बल्कि देशभर के युवाओं के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन गया है, जो भारत को एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र बनाने में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं.