नई दिल्ली: अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने वाला बिल आगे बढ़ाया है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह दबाव में नहीं आएगा. भारत ने मंगलवार को स्पष्ट कहा कि अमेरिका चाहे जो भी कदम उठाए, देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से तेल की खरीद जारी रखेगा. अमेरिकी सीनेट ने ‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान बिल’ को 86-11 के भारी बहुमत से पास कर दिया था. अब यह बिल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में जाएगा, जहां गुरुवार को वोटिंग होने की उम्मीद है. अगर यह पास हो जाता है तो रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों (जिनमें भारत और चीन शामिल हैं) पर 100 फीसदी टैरिफ लग सकता है.
भारत का रुख साफ
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों से जुड़े फैसले 140 करोड़ नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर करता है. वह आगे भी इसी नीति पर कायम रहेगा. भारत सरकार से जुड़े सूत्रों ने भी कहा कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन नीति में कोई बदलाव नहीं होगा और रूस से तेल खरीद जारी रहेगी. कुछ अमेरिकी सांसदों ने मांग की है कि बिल में सीधे भारत का नाम लिख दिया जाए. पहले बिल में सिर्फ ‘रूस से तेल खरीदने वाले देशों’ का जिक्र था. अब भारत, चीन, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, यूएई, सिंगापुर, कजाखिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशों का नाम साफ-साफ शामिल करने की बात हो रही है.
हले भी लगा चुका है जुर्माना
अमेरिका पहले भी भारत पर यह आरोप लगा चुका है कि रूस से तेल खरीदकर वह यूक्रेन युद्ध में रूस की आर्थिक मदद कर रहा है. पिछले साल अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ भी लगाया था. तब भी भारत ने साफ कहा था कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा. भारत का रुख एक बार फिर साफ है, अमेरिका की धमकी के बावजूद रूस से तेल खरीद जारी रहेगी.