नई दिल्ली: प्रदूषण और पानी की कमी से जूझ रही यमुना नदी के कायाकल्प के लिए केंद्र सरकार और बेसिन के राज्यों ने मिलकर एक बड़ा रणनीतिक खाका तैयार किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने बहुप्रतीक्षित 'किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना' समझौते पर औपचारिक मुहर लगा दी है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत केंद्र सरकार ने साल 2029 तक यमुना को पूरी तरह स्वच्छ और अविरल बनाने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है।
नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दशकों से यमुना के पानी के बंटवारे में एक बड़ी चूक यह रही कि नदी के अपने प्राकृतिक व पर्यावरणीय प्रवाह (Environmental Flow) की गणना नहीं की गई और सारा पानी राज्यों में बांट दिया गया। किशाऊ परियोजना के धरातल पर उतरने से यमुना को 25 प्रतिशत अतिरिक्त जल उपलब्ध होगा, जिससे नदी का इको-फ्लो सुधरेगा और दिल्ली सहित पूरे बेसिन में पानी की किल्लत दूर होगी।
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि जब तक यमुना साफ नहीं होगी, तब तक प्रयागराज में मिलने वाली मां गंगा को पूरी तरह स्वच्छ करने का संकल्प अधूरा रहेगा। केंद्र सरकार ने किशाऊ परियोजना को 'राष्ट्रीय परियोजना' घोषित किया है, जिसका 90 प्रतिशत वित्तीय भार केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि 10 प्रतिशत खर्च राज्यों द्वारा साझा किया जाएगा।
इस परियोजना के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा विशाल कंक्रीट ग्रैविटी डैम बनाया जाएगा। इस जलाशय में 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी स्टोर करने की क्षमता होगी, जिससे 97,000 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत का उत्पादन होगा। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) की निगरानी और नदी में गिरने वाले नालों के पानी को पूरी तरह शोधित करने के लिए सभी राज्य एक संयुक्त एक्शन प्लान पर मिलकर काम करेंगे।