फरीदाबाद के रोशन नगर में एक परिवार ने अपनी बहू को मौत के घाट उतारने के बाद उसका शव खुद के ही घर के बाहर दफना दिया। ये वारदात अप्रैल महीने में हुई, लेकिन असलियत जून के आखिर में सामने आई, जब दो महीने पुराना राज मिट्टी खोदने से सामने आया। 23 अप्रैल को अरुण सिंह और उसके पिता ने अपने घर के बाहर गली में एक गड्ढा खुदवाया। 10 फुट गहरा गड्ढा देखकर पड़ोसियों के मन में भी सवाल खड़ा हुआ, तो उन लोगों ने बताया की पानी से जुड़ा कुछ मामला है। शाम को गड्डा खोदा गया और रात में इसे शांति से बंद भी कर दिया गया। अगले दिन लोगों को गड्ढा मिट्टी से भरा मिला। जब लोगों ने पूछा, तो परिवार ने काम रद्द करने की बात कह दी। इसके दो दिन बाद उन्होंने थाने में बहू तन्नू के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई - यह दावा करते हुए कि वह मानसिक रूप से कमजोर थी।
गुमशुदगी नहीं, गहरी साजिश से दिया गया अंजाम

तन्नू के मायके वालों को शक था कि बेटी को मार दिया गया है। उन्होंने बार-बार पुलिस से अपील की, लेकिन पुलिस हर बार उन्हें टालती रही। कभी लापता लड़कियों की लंबी सूची दिखाकर, तो कभी यह कहकर कि 'बेटी को जिंदा लाकर देंगे।' तन्नू का परिवार लापता की खबर सुनने के अगले ही दिन उसके ससुराल में गया था, उन्होंने गड्डा भी देखा था और परिवार पर शक भी हुआ। तन्नू का परिवार चुप नहीं बैठा। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से गुहार लगाई और आखिरकार पुलिस को मजबूरन उस गड्ढे की खुदाई करवानी पड़ी। शुक्रवार को नायब तहसीलदार की निगरानी में जैसे ही मिट्टी हटाई गई, अंदर से तन्नू का सड़ा-गला शव मिला। शव पर ईंटें डालकर, ऊपर मिट्टी भर दी गई थी, ताकि किसी को शक न हो। हत्या के आरोप में मृतका के पति अरुण और ससुर को हिरासत में लिया गया है। बाकी दो पर भी केस दर्ज हुआ है।

तन्नू की शादी दो साल पहले हुई थी। मायके वालों ने बताया कि शादी के बाद से ही ससुराल वाले दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। फोन पर बात नहीं करने देते थे और जबरदस्ती उसके मुस्कुराते हुए वीडियो बनवाकर भेजते थे और कहते थे देखो, कितनी खुश है। इस मामले के बाद लोगों के मन में सवाल यह आ रहा है कि अगर पुलिस ने समय पर कार्रवाई करती, तो क्या तन्नू को इतने ऐसे अंजाम से बचाया जा सकता था?