नई दिल्ली: कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (केडीएमसी) में हाल ही में हुए चुनावों के बाद राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है. 122 सीटों वाली इस निकाय में कोई भी दल अकेले बहुमत (61) तक नहीं पहुंच सका, जिससे सत्ता बनाने के लिए गठबंधन और समर्थन की जद्दोजहद तेज हो गई.
शिंदे गुट की शिवसेना ने 53 सीटें जीतकर सबसे बड़ा दल बनकर उभरी, जबकि भाजपा को 50 सीटें मिलीं. दोनों मिलकर सत्ता की दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन असली खेल पोस्ट-पोल समर्थनों और संभावित बदलावों में चल रहा है. हाल ही में एक बड़ा मोड़ तब आया जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के पांच पार्षदों ने शिंदे गुट को समर्थन दे दिया. इससे शिंदे गुट की ताकत बढ़कर 58 हो गई, जो बहुमत से अब सिर्फ तीन कदम दूर रह गई.
इसी बीच उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका लगा है. उनके गुट से चार नवनिर्वाचित पार्षद अचानक संपर्क से बाहर हो गए हैं. पार्टी का दावा है कि ये पार्षद लापता हैं और संभवतः उन्हें जबरन कहीं रखा गया है या दबाव में लाकर दल-बदल करवाया जा रहा है. इन चारों पार्षदों के नाम हैं, मधुर म्हात्रे, कीर्ति धोणे, राहुल कोट और स्वप्निल केने.
पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज
पार्टी ने कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन में इनके लापता होने की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और तत्काल खोजबीन की मांग की है. कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि दो पार्षद शिंदे गुट के संपर्क में हैं, जबकि बाकी के ठिकाने अभी तक अज्ञात हैं. अटकलें हैं कि अगर ये पार्षद शिंदे गुट में शामिल हो जाते हैं, तो शिंदे गुट को स्पष्ट बहुमत मिल सकता है, जिससे उद्धव गुट को कल्याण में करारी हार का सामना करना पड़ सकता है.
राउत ने शिंदे पर साधा निशान
कुछ संभावनाएं यह भी जताई जा रही हैं कि ये पार्षद मनसे में वापस लौट सकते हैं. शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने इस घटना पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने एकनाथ शिंदे पर आरोप लगाया कि राजनीति में अब पैसों और दबाव से वफादारी खरीदी जा रही है. उन्होंने शिंदे को 'सामंत' करार देते हुए कहा कि वे लोगों को खरीदने का खेल खेल रहे हैं.
यह पूरा घटनाक्रम महाराष्ट्र की सियासत में नई हलचल पैदा कर रहा है, खासकर तब जब एकनाथ शिंदे गुट पहले ही मनसे के साथ गठजोड़ करके मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ये 'लापता' पार्षद आखिरकार किस तरफ जाते हैं और केडीएमसी में मेयर कौन बनेगा.