नई दिल्ली : ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों की सेनाओं में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक को लेकर गतिविधियां तेज हुई हैं. इसी बीच पाकिस्तान ने अमेरिका की ड्रोन कंपनी पावरउस के साथ समझौता किया है. कंपनी के सह-संस्थापक के मुताबिक पाकिस्तान सेना के साथ हुए एमओयू में ड्रोन से जुड़ा शुरुआती ऑर्डर भी शामिल है, हालांकि उसकी कीमत और तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.
पॉवरउस का संबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटों डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप से जुड़े निवेश से भी है. अमेरिकी नियामकीय दस्तावेजों के मुताबिक उनके निवेश वाहन अमरीकन वेंचर की प्रस्तावित मर्जर कंपनी में करीब 9.9% हिस्सेदारी रहने की उम्मीद है.
इसी बीच अमेरिकी डिफेंस एनालिस्ट सैमुअल बेनडेट ने रूसी सैन्य वेबसाइट Rybar की एक काल्पनिक रेंज मैप को साझा किया। इसमें यह दिखाने की कोशिश की गई कि अगर भविष्य में भारत को रूसी Geran-5 जैसे ड्रोन मिलते हैं और उन्हें भारतीय क्षेत्र से संचालित किया जाए, तो उसकी सैद्धांतिक पहुंच पाकिस्तान के बड़े हिस्से तक हो सकती है. हालांकि यह किसी भारतीय सैन्य ऑपरेशन या खरीद योजना का प्रमाण नहीं है.
Geran-5 रूस का नया जेट-इंजन वाला हमला करने वाला ड्रोन है. रिपोर्टों के मुताबिक इसकी गति पुराने प्रोपेलर आधारित Geran ड्रोन से काफी ज्यादा है और यूक्रेन में ऐसे जेट-चालित ड्रोन ने एयर डिफेंस पर दबाव बढ़ाया है. Reuters के अनुसार सितंबर में यूक्रेन की वायु रक्षा जेट-चालित Shahed श्रेणी के ड्रोन के खिलाफ लगभग 60 प्रतिशत इंटरसेप्शन दर पर थी.
हालांकि Geran-5 को सीधे Shahed-136 की कॉपी कहना पूरी तरह सटीक नहीं माना जाता. उपलब्ध विश्लेषणों में इसके डिजाइन को ईरान के Karrar ड्रोन से भी जोड़ा गया है. इसलिए इसकी उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग दावे मौजूद हैं.