काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए बाढ़ राहत के लिए भारत और चीन का आभार जताया है. उन्होंने कहा कि भोटेकोशी-त्रिशूली आपदा के तुरंत बाद दोनों पड़ोसी देशों ने नेपाल को बेहद तत्परता और उदारता के साथ सहायता प्रदान की. बीते 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन के कारण त्रिशूली और भोटेकोशी नदियों में भीषण बाढ़ आई थी.
इस आपदा में 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों अब भी लापता हैं. बाढ़ के कुछ दिनों बाद नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने जलवायु परिवर्तन के मुआवजे की बात करते हुए भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों का जिक्र किया था. अब पीएम बालेन शाह ने मदद के लिए खास तौर पर भारत और चीन की तारीफ की. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र प्रणाली, मानवीय एजेंसियों और अन्य सहयोगी देशों का भी आभार व्यक्त किया.
साथ ही हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर पिघलने, अचानक बाढ़ आने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर चिंता जताई. बालेन शाह ने कहा कि युद्ध के साजो-सामान समय पर पहुंच जाते हैं, लेकिन जरूरत के समय किसान को खाद या ईंधन नहीं मिल पाता. नेपाली प्रधानमंत्री ने भारत और चीन से एक अपील भी की.
उन्होंने तीनों देशों के नेतृत्व में एक हिमालयी जलवायु तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जिसमें उपग्रह डेटा साझा करने, खतरनाक हिमनदीय झीलों की निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली मजबूत करने और आपदा के समय सीमा पार राहत का समन्वय करने की बात कही.