नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए गुरुवार का दिन बेहद दुखद रहा. घोसी विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और वर्तमान विधायक सुधाकर सिंह का निधन हो गया. दो दिन पहले अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां गुरुवार तड़के उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली.
उनके जाने की खबर से पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई है. सुधाकर सिंह वही जुझारू योद्धा थे जिन्होंने 2023 के घोसी उपचुनाव में योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान को करारी शिकस्त देकर भाजपा के पूरे 'मास्टर प्लान' को नेस्तनाबूद कर दिया था. उस जीत ने न सिर्फ सपा कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकी थी, बल्कि पूरे विपक्ष को यह संदेश दिया था कि भाजपा को हराया जा सकता है.
राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखने वाले सुधाकर सिंह ने 1996 में पहली बार नत्थूपुर (अब घोसी) से विधायक बनकर विधानसभा में प्रवेश किया था. 2012 में भी उन्होंने इसी सीट से शानदार जीत हासिल की. 2017 में भाजपा लहर में फागू चौहान से हार मिली. 2019 के उपचुनाव में टिकट न मिलने पर निर्दलीय लड़े और सपा ने खुलकर समर्थन किया, हालांकि उस बार जीत नहीं मिली.
2022 के चुनाव में फिर टिकट कट गया, वे खुलकर नाराज हुए, बगावती तेवर दिखाए, लेकिन पार्टी नहीं छोड़ी. अंततः 2023 में जब दारा सिंह चौहान ने सपा छोड़कर भाजपा जॉइन की और उपचुनाव हुआ, तो अखिलेश यादव ने सुधाकर सिंह पर फिर भरोसा जताया. सुधाकर ने इस विश्वास को कायम रखते हुए भाजपा के दिग्गज को धूल चटाकर सपा की झोली में बड़ी जीत डाली.