नई दिल्ली: राजस्थान रॉयल्स और लखनऊ सुपरजाइंट्स के बीच खेले गए मुकाबले को बेशक रियान पराग की कप्तानी वाली राजस्थान हार गई हो, लेकिन इस मुकाबले में राजस्थान के 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने सबका दिल जरूर जीत लिया. पहले ही मुकाबले में पहली ही बॉल पर लॉर्ड शार्दुल कहे जाने वाले मैच विनर गेंदबाज के खिलाफ कवर्स के ऊपर से जो छक्का लगाया पूरी दुनिया इस शॉट की दीवानी हो गई. और हर तरफ वैभव के नाम की चर्चा होने लगी. हर कोई जानना चाहता है कि ये 14 साल का लड़का है कौन? कहां से आया है? क्या इसका क्रिकेट का कोई फैमिली बैकग्राउंड है? बस इन्हीं सारे सवालों का जवाब ढूंढने के लिए ग्लोबल भारत टीवी की टीम पहुंची बिहार के उस गांव में जहां वैभव का जन्म हुआ था. और जिस गांव की मिट्टी में गली क्रिकेट खेलकर ये खिलाड़ी आईपीएल के मैदान का महारथी बन गया.
"वैभव सूर्यवंशी बिहार के समस्तीपुर जिले में पड़ने वाले गांव ताजपुर के रहने वाले हैं. उनके पिता संजीव सूर्यवंशी और मां देवघर गए हुए हैं. घर पर सिर्फ वैभव के चाचा राजीव सूर्यवंशी हैं. जिन्हें अपने भतीजे की इस उपलब्धि पर बेहद गर्व है और वो चाहते हैं कि जल्द से जल्द वैभव देश लिए नीली जर्सी में खेलता दिखाई दे."
जब गांव का एक लड़का पूरे प्रदेश का नाम रौशन करता है तो वो पूरे गांव का बेट बन जाता है. यही बात ताजपुर में भी देखने को मिली, जब हमारी टीम इस गांव में मौजूद थी तो हर किसी की जुबान पर वैभव का नाम था. लोग इस युवा बल्लेबाज की तारीफ करते थक नहीं रहे थे. जिसके बाद हमारी टीम उस जगह पर भी पहुंची जहां गांव के बच्चे वैभव से प्रेरणा लेकर क्रिकेट सीखते हैं. तस्वीरो में दिख रहा ये मैदान वही है, जिसकी मिट्टी पर पसीना बहा कर वैभव आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं. अब स्पोर्ट्स में रुचि रखने वाला गांव का हर बच्चा वैभव की तरह ही बनना चाहता है. यही वजह है कि चाहे सर्दी हो या गर्मी बच्चे इस जगह पर आते हैं, और प्रेक्टिस करते हैं. वहीं पर मिले वैभव के पड़ोसी संजय नायक बताते हैं कि
"वैभव के सिर पर बचपन से ही क्रिकेट का जुनून सवार रहता था, वैभव के दिमाग में हमेशा बस क्रिकेट ही रहता था, और जब IPL में राजस्थान रॉयल्स ने वैभव को खरीदा तो पूरे गांव में जश्न मनाया गया. इसके बाद जिस दिन वैभव ने अपने पहले ही मैच में जो छाप छोड़ी है उससे पूरे गांव का सीना गर्व से चौड़ा हुआ है. पूरे गांव ने ना सिर्फ वैभव की पारी को देखा, बल्कि उस दिन पूरे गांव में किसी त्योहार की तरह जश्न मनाया गया"
तो वहीं जब हमारे सहयोगी अभिशेक चतुर्वेदी ने वैभव के कोच मनीष ओझा से बात की तो उन्होंने बताया कि किस तरह से अपने शिष्य की उपलब्धि पर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है. साथ ही कोच ने ये भी खुलासा किया कि जिस तह से वैभव ने खेल खेला वो उनका नेचुरल गेम है. आगे इससे भी ज्यादा धमाकेदार पारियां वैभव के बल्ले से निकलने वाली हैं.
कोच के भरोसे पर तो वैभव खरे उतर चुके हैं, लेकिन अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानि कि BCCI ने भी वैभव पर नजर रखना शुरू कर दिया है. क्योंकि अगर वैभव के खेल में इसी निरंतरता और आक्रमकता बनी रही तो सहवाग के बाद जो आक्रमक ओपनर की जगह खाली हुई थी, उसे वैभव के द्वारा बीसीसीआई भर सकता है. हालांकि रोहित शर्मा ने अपने करियर में भारतीय टीम को अनेकों बार धमाकेदार शुरूआत दिलाई हैं, लेकिन रोहित अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं. और टी-20 से सन्यास ले चुके हैं. ऐसे में वैभव भारतीय टीम के एक भरोसेमंद ओपनर बन सकते हैं. अगर सूत्रों की मानें तो पहली पारी देखने के बाद खुद bcci अध्यक्ष रोजर बिन्नी भी 14 साल के युवा खिलाड़ी में अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. हालांकि वैभव इन उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाएंगे ये तो आने वाला वक्त ही बता पाएगा. लेकिन एक बात पक्की है कि अगर वो इसी तरह से आगे भी खेले तो भारतीय टीम को ऐसा खिलाड़ी मिलने वाला है जो फास्ट बॉलर और स्पिनर दोनों पर कहर बरसा सकता है.