नई दिल्ली: दुबई में होने वाला भारत-पाकिस्तान एशिया कप मैच शुरू होने से पहले ही राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है. विपक्षी दल इसकी निंदा कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे खेल की आवश्यकता बताकर बचाव कर रही है. शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र में "सिंदूर" प्रदर्शन किए और नागरिकों से मैच का बहिष्कार करने की अपील की, इसे पहलगाम आतंकी हमले के शहीदों और पीड़ितों का अपमान बताया.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सवाल उठाया कि क्या यह मैच "ट्रंप के दबाव में" आयोजित हो रहा है. वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) ने बचाव में कहा कि कांग्रेस शासनकाल में भी तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच खेले गए थे. क्रिकेट प्रशंसक इस मुद्दे पर बंटे हैं, कुछ का मानना है कि देश में इतनी बड़ी घटना के बाद यह मैच नहीं होना चाहिए.
विपक्ष भारत के इस मैच में भाग लेने का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि वे इसे पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद राष्ट्रीय भावनाओं के साथ विश्वासघात मानते हैं. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के लिए यह मैच सरकार की "देशभक्ति के कारोबार" का प्रतीक है. ठाकरे ने बीजेपी पर शहीदों के सम्मान से ज्यादा पैसे को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया. उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री ने कहा था कि "खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते," तो फिर पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंध कैसे संभव हैं.
पार्टी ने मुंबई में 'सिंदूर' प्रदर्शन किया, जिसमें महिला कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक रूप से पीएमओ को सिंदूर भेजा, तर्क देते हुए कि पाकिस्तान के साथ क्रिकेट सैनिकों और आतंकी हमलों के पीड़ितों का अपमान है. ठाकरे ने कहा, "हमारे प्रधानमंत्री ने कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते, तो फिर खून और क्रिकेट कैसे एक साथ हो सकते हैं? युद्ध और क्रिकेट एक साथ कैसे हो सकते हैं? उन्होंने देशभक्ति का कारोबार किया है. यह देशभक्ति का कारोबार केवल पैसे के लिए है. वे कल भी मैच खेलने जा रहे हैं क्योंकि उन्हें उससे होने वाली कमाई चाहिए."
अरविंद केजरीवाल ने भी कहा, "प्रधानमंत्री को पाकिस्तान के साथ मैच आयोजित करने की क्या जरूरत है? पूरा देश कह रहा है कि यह मैच नहीं होना चाहिए. फिर यह मैच क्यों आयोजित हो रहा है? क्या यह भी ट्रंप के दबाव में हो रहा है? आप ट्रंप के सामने कितना झुकेंगे? पाकिस्तान के साथ मैच खेलना देश के साथ विश्वासघात है. हर भारतीय इस बात से बेहद नाराज है."
आदित्य ठाकरे ने मैच के पूर्ण बहिष्कार की मांग करते हुए कहा, "मैच का बहिष्कार आज भी हो सकता है. बीसीसीआई अभी भी दिखा सकता है कि वह भारत का है, न कि पैसे के लालच का. बीसीसीआई अभी भी साबित कर सकता है कि वह राष्ट्रविरोधी नहीं है. क्या विश्व की सर्वश्रेष्ठ टीम के लिए 2 अंक इतने मायने रखते हैं? आज मैदान पर खेलने वाले खिलाड़ियों को यह समझना चाहिए कि वे उस देश के खिलाफ खेल रहे हैं, जहां से आतंकवादी हमारे देश में आए और मासूम लोगों की हत्या की.''
उन्होंने आगे कहा, ''पहलगाम में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के बारे में सोचें. आतंकवादियों को पनाह देने वाले देश का बहिष्कार करने से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता. यह शर्मनाक है कि यह सब जानते हुए भी खेल को आगे बढ़ाया जा रहा है. आज हमें एक ऐसी केंद्र सरकार की कमी खल रही है जो ऐसे राष्ट्रविरोधी कृत्यों पर सख्ती से कार्रवाई करती. दुख की बात है कि बीजेपी ने अपनी विचारधारा और देशभक्ति की परिभाषा बदल दी है."