Gujarat Bulldozer Action: ये है गुजरात के अहमदाबाद में बंसी चंदोला झील, जहां इतिहास की सबसे भयंकर कार्रवाई हो रही है, 40 क्रेन और 60 जेसीबी के साथ 400 से ज्यादा जवान वहां बसे बांग्लादेशियों को ये बताने पहुंचे हैं कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है, यहां जो भी अवैध रूप से रहेगा, उसके ठिकाने पर बुलडोजर चलेगा. 8 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलेगा. पर सवाल ये है कि गुजरात में जब इतने लंबे वक्त से बीजेपी की सरकार है, फिर ये कब्जा हुआ कैसे? तालाब की जमीन जो बीजेपी धड़ल्ले से खाली करवा रहे हैं, करीब 450 वक्फ के कब्जे वाली जगहों पर बुलडोजर बीते कुछ दिनों में चला दिया, नेपाल बॉर्डर के इलाकों पर सफाई अभियान चला रहे हैं,
आप शायद ये जानकर दंग रह जाएं कि ये कार्रवाई का दूसरा चरण है, इससे पहले डेढ़ लाख वर्ग मीटर जमीन कब्जामुक्त हो चुकी है, और अबकी बार ढाई लाख वर्ग मीटर जमीन को खाली कराने की कार्रवाई जारी है.इस एक्शन को कई लोग भारत में चल रहे देशद्रोहियों के सफाई अभियान से जोड़कर भी देख रहे हैं, एक तरफ गुजरात के गृहमंत्री हर्ष सांघवी ट्विटर पर एक लड़की का वीडियो शेयर करते हैं, जो शिव तांडव गाकर सबको मंत्रमुग्ध कर देती है. तो दूसरी तरफ अतिक्रमण के खिलाफ तांडव जारी है.
लेकिन सवाल ये है कि आखिर इन जमीनों पर कब्जा हुआ कैसे, वहां के पुलिस कमिश्नर जीएस मलिक कहते हैं.
“पिछले महीने शहर में 250 अवैध बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए थे, जिनमें से 207 चंडोला तालाब के अवैध निर्माणों में रहते थे और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े थे. इससे पहले साल 2009 में 95 अवैध बांग्लादेशी पकड़े गए थे, तब भी यहां डिमोलिशन किया गया था. डिमोलिशन के दूसरे चरण के दौरान एक जेसीपी, एक एडीसीपी, 6 डीसीपी, एसीपी, और पीआई सहित कुल 3 हजार से ज्यादा पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे. 25 एसआरपी कंपनियां भी मौजूद रहेंगी.”
यानि पुलिस की तैयारी पूरी है, अगर किसी ने हाथों में पत्थऱ उठाने या कानून व्यवस्था बिगाड़ने की हिमाकत की तो उसे मुंहतोड़ जवाब मिलने वाला है. कहा जाता है यहां अवैध कब्जे की शुरुआत 70-80 के दशक में हुई.
टीवी 9 की रिपोर्ट दावा करती है यहां से देश के 4 दुश्मन भी पकड़े गए थे, ये इलाका अवैध कामों का अड्डा बनता जा रहा था, जिसके बाद गुजरात सरकार खास तौर पर वहां के गृहमंत्री हर्ष संघवी ने इस इलाके में कार्रवाई के आदेश दिए, नतीजा कुछ लोग कोर्ट पहुंच गए, लेकिन हाईकोर्ट ने राहत देने से साफ इनकार कर दिया, और आखिर राहत मिलनी भी क्यों चाहिए, कोई दूसरे देश से आया व्यक्ति हमारे देश में आकर हमारे संसाधन इस्तेमाल करे, हमारी जमीनों पर कब्जा जमाए और गलत काम करे, उसके बाद उसे हटाएं तो वो कोर्ट जाकर कहे हम मत हटाइए, आखिर ये कौन सी मानसिकता है. आप इस कार्रवाई को कैसे देखते हैं, अपनी राय जरूर दें.