नई दिल्ली: उज्जैन से सामने आए संन्यास विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है. इस मामले में चर्चा में रहीं स्वामी हर्षानंद गिरि (पूर्व में हर्षा रिछारिया) ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपने ऊपर लग रहे आरोपों का जवाब दिया है. हर्षा ने कहा कि पिछले लगभग डेढ़ साल से वे लगातार मानसिक और सामाजिक दबाव तथा आलोचना का सामना कर रही हैं, लेकिन अब वे पहले से अधिक मजबूत हैं.
उन्होंने अपने संन्यास को निजी आस्था और आध्यात्मिक निर्णय बताया और कहा कि उनका मानना है कि यह मार्ग उनके जीवन का हिस्सा है, जिसे कोई रोक नहीं सकता. वे हाल ही में उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में दीक्षा लेकर आधिकारिक रूप से संन्यास जीवन में प्रवेश कर चुकी हैं. इसके बाद से वे स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जा रही हैं. य
ह दीक्षा महंत सुमनंदजी महाराज द्वारा दी गई बताई जाती है. इस फैसले को लेकर संत समाज के कुछ वर्गों में असहमति भी सामने आई है. मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष अनिलानंद महाराज सहित कुछ संतों ने इस पर आपत्ति जताई है, जिससे यह विवाद और बढ़ गया.
अपने वीडियो संदेश में हर्षा ने कहा कि इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जहां लोगों को अपने रास्ते पर चलने के लिए विरोध और आलोचना का सामना करना पड़ा. उन्होंने विभिन्न आध्यात्मिक और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में परिवर्तन और आत्मिक निर्णय किसी भी उम्र में संभव हैं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया और सोशल मीडिया पर उनकी छवि को लेकर गलत तरीके से चर्चा की गई. उनके अनुसार, कुछ लोग इस विवाद को सिर्फ चर्चा और लोकप्रियता के लिए बढ़ा रहे हैं.
हर्षा ने संत समाज से अपील करते हुए कहा कि धर्म का उद्देश्य लोगों को जोड़ना होना चाहिए, खासकर युवाओं को, न कि उन्हें दूर करना. उन्होंने अपने संदेश के अंत में कहा कि वे अपने विश्वास और आध्यात्मिक मार्ग पर अडिग हैं और उनका मानना है कि उनका मार्ग ईश्वर द्वारा निर्धारित है.