सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर जिस हिसाब की टिप्पणी की है, उसके बाद से सवाल उठ रहे हैं कि क्या बाबा के बुलडोजर पर स्पीड ब्रेकर लग जाएगा. जब सुप्रीम कोर्ट ये सख्त टिप्पणी कर रही थी तो सीएम योगी क्या कर रहे थे. उनका बुलडोजर कहां कहर बरपा रहा था, ये बताएं उससे पहले सुनिए सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ.
इस मामले में याचिका जहांगीपुरी के वकील फरुख रशीद ने दाखिल की थी, जिनका कहना था कि सरकार बिना जाने-बूझे बुलडोजर चला रही है, यहां तक कि उदयपुर की उस घटना का उदाहरण भी सुप्रीम कोर्ट में दिया गया, जहां स्कूल में दो लड़कों की लड़ाई के बाद आरोपी लड़के के घर को बुलडोजर से ढहा दिया गया. मध्य प्रदेश के मामले का भी जिक्र हुआ. मध्य प्रदेश के छतरपुर में बीते दिनों शहजाद के आलीशान महल को मोहन यादव की पुलिस ने मिट्टी में मिला दिया था, जिसके बाद सवाल इस बात पर उठ रहे थे कि ऐसे तो किसी पर आरोप लगाकर घर ढहा दिया जाएगा, यही चिंता सुप्रीम कोर्ट भी जता रहा है, सुप्रीम कोर्ट में बकायदा वकीलों की फौज ये कह रही है कि मीलॉर्ड बुलडोजर जस्टिस को रोकना होगा, कुछ लोग इसके समर्थन में खड़े होकर ताली बजा रहे हैं, जबकि जिन लोगों पर बीत रही है, उनका दर्द हमें समझना होगा.
अब तय सुप्रीम कोर्ट को करना है कि बुलडोजर एक्शन के लिए वो क्या गाइडलाइन बनाती है, हो सकता है गाइडलाइन में बिना किसी के दोषी साबित हुए, बुलडोजर एक्शन पर ब्रेक लग जाए, जिसका सीधा सा मतलब ये होगा कि जैसे पहले राजस्व विभाग की टीम महीनों और बरसों की जांच-पड़ताल के बाद आती थी, वैसे ही काम होगा. तुरंत एक्शन वाली बात रुक जाएगी.
हालांकि चर्चा ये भी है कि योगी सरकार के वो वकील, जिन्होंने पिछली सुनवाई में अपनी दलीलों से जजों को भी दीवाना बना लिया था, शायद किताब के पन्ने पलट रहे होंगे, और अगली सुनवाई पर अलग तरीके से अपना पक्ष रखें. क्योंकि बड़ी बात ये थी कि जब सुप्रीम कोर्ट में उधर बुलडोजर पर ब्रेक लगाने को लेकर सुनवाई चल रही थी तो यूपी में बाबा का बुलडोजर बेरोकटोक के गरज रहा था. काशी से मैनपुरी तक से बीते 48 घंटे में कई ऐसी तस्वीरें आई, जिस पर अखिलेश सवाल उठाते दिखे.
अखिलेश ने ये तक लिख दिया कि काशी के प्रतीक चिन्हों को विकास के नाम पर तोड़कर भाजपा सरकार क्या वाराणसी की विरासत को ही खंडित कर देना चाहती है. अब रोहनिया में 55 साल पहले 1968 में बने गांधी चबूतरा व भारत माता मंदिर को चौड़ीकरण के नाम पर तोड़ दिया गया है. अगर ‘क्योटो’ इतिहास की धरोहर को धूल में मिलाकर बनना है तो परंपरा प्रेमी काशीवासियों के बीच इसके लिए एक सार्वजनिक जनमत करा लेना चाहिए.
अब जनमत की बात अखिलेश यादव कहां से ले आए, ये वही जानें, पर बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ये साफ बता रही है कि अगले 15 दिनों में देश में कुछ बड़ा होने वाला है, जिसका सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश पर पड़ेगा. आपके हिसाब से गाइडलाइन में क्या-क्या होना चाहिए, जरूर बताइए, क्योंकि सवाल बाबा के बुलडोजर का है.