ऐसा कम होता हैं जब किसी मुख्यमंत्री आवास में ही किसी महिला के साथ ग़लत हो जा. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चुनाव के दौरान जब कुछ दिनों की ज़मानत पर आए थे, उन्हीं दिनों उनके सामने ही सीएम आवास में स्वाति मालीवाल के साथ मार-पीट की ख़बर आई थी. हालांकि उसके बाद भी अरविंद केजरीवाल ने सीना जोरी करते रहे और विभव कुमार को बचाने के लिए हर हथकंडा अपनाते रहे, लेकिन कहते हैं कि एक ना एक दिन न्याय ज़रूर होता है.
अरविंद केजरीवाल के पूर्व पीए विभव कुमार की कोर्ट में पेशी हुई. जज साहब के सामने वो पहुंचा, उसके सामने जो हुआ वो शायद सुप्रीम कोर्ट में रोज़ नहीं होता है. कोर्ट में दो जजों की बैंच की सुनवाई शुरू होती है. सबसे पहले कोर्ट स्वाति मालीवाल का पक्ष सुनता हैं, फिर दिल्ली पुलिस की दी हुई सीडी और सीसीटीवी देखता है. फोन रिकॉर्डिंग और फोन से डिलीट डाटा देखता है.
आप हैरान होंगे कि विभव कुमार जिसे सुप्रीम कोर्ट ने गुंडा कहा था उसको बचाने के लिए केजरीवाल ने अभिषेक मनु सिंधवी हायर किया है. कोर्ट में सिंघवी के सामने ही ये सब होता है. अभिषेक मनु सिंघवी ने बिभव की पैरवी करते हुए कहा कि ‘मीलॉर्ड’ एफआईआर तीन दिन बाद दर्ज कराई गई. मालीवाल थाने गई लेकिन बिना एफआईआर दर्ज कराए लौट गईं.
सुप्रीम कोर्ट ने चार्जशीट के बारे में पूछा तो वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जिस आदेश को हमने चुनौती दी है उसके बाद चार्जशीट दाखिल हुई है. ये सुनकर सुप्रीम कोर्ट के जज कहते हैं. ‘’जिस तरह से चीजें घटित हुई हैं, उससे हम स्तब्ध हैं. क्या सीएम का बंगला निजी आवास है? क्या ऐसे गुंडों को रखने के लिए उस कार्यालय की आवश्यकता है? क्या यही तरीका है? हम हैरान हैं. सवाल यह है कि यह कैसे हुआ. मालीवाल ने उसे रुकने के लिए कहा लेकिन वह आदमी नहीं रूका. वह क्या सोचता है? क्या उसके सिर में शक्ति सवार है?’’
‘’आप पूर्व सचिव थे, अगर पीड़िता को वहां रहने का अधिकार नहीं था तो आपको वहां रहने का अधिकार नहीं था. आपने ऐसा दिखाया जैसे कोई गुंडा परिसर में घुस आया हो. आपको ऐसा करने में कोई शर्म आती है? स्वाति एक युवा महिला है. क्या आपको लगता है कि उस कमरे में मौजूद किसी को भी बिभव के खिलाफ कुछ भी कहने की हिम्मत हुई होगी?’’
सुनवाई के दौरान सिंघवी ने हत्या के दो मामलों में आरोपी को जमानत मिलने का हवाला दिया तो जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘’हमें उन मामलों का हवाला ना दें, क्योंकि यहां किस तरह से घटनाक्रम हुआ वो हमारी चिंता का कारण है. आपको एक महिला से ऐसा बर्ताव करते शर्म नहीं आई? हम कॉन्ट्रैक्ट किलर, हत्यारों को भी जमानत देते हैं लेकिन इस मामले में, किस तरह की नैतिक दृढ़ता है?’’
हालांकि सिंघवी फिर से दलील देते हैं, और कहते हैं. ‘’पहले दिन वह पुलिस के पास गई पर कोई शिकायत नहीं की, लेकिन फिर तीन दिन बाद शिकायत दर्ज हुई.’’ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि क्या मालीवाल ने 112 पर कॉल किया? अगर हां तो यह आपके दावे को झूठा साबित करता है कि उसने मनगढ़ंत कहानी गढ़ी. सिंघवी ने माना कि वो सीएम आवास गई थी.
हांलाकि की कोर्ट ने फिर से जो कहा उसके बाद दो अभिषेक मनु सिंघवी हैरान रह गए. जस्टिस सूर्यकांतकांत ने पूछा कि क्या सीएम का सरकारी घर निजी आवास है? क्या इसके लिए इस तरह के नियमों की जरूरत है? हम हैरान हैं, यह मामूली या बड़ी चोटों के बारे में नहीं है. हाईकोर्ट ने हर बात को सही तरीके से सुना है.
गौरतलब हो कि सुप्रीम कोर्ट ने जब नेम प्लेट वाला विवाद टाला था, उसमें भी वकील अभिषेक मनु सिंघवी थे, जिसके बाद कोर्ट को लेकर तरह तरह की बातें हुई थी, लेकिन अगस्त की पहली तारीख में ही केजरीवाल के झूठ से जनता को आज़ादी मिल गई. महिला का मुद्दा उठाते हैं और खुद के सीएम आवास में ऐसा करते हैं.