नई दिल्ली: मुर्शिदाबाद में वक्फ का विरोध करने के नाम पर जो हिंसा हुई है, उसने कई परिवारों को तबाह करके रख दिया है. हिंसक भीड़ के हाथों अपनी जान गंवाने वाले बेगुनाह गोविंद दास और चंदन दास के परिवार ने बंगाल से भागकर अपनी जान बचाई है, तो सैकड़ों परिवार ऐसे भी हैं जो अभी भी डर के साए में जी रहे हैं. इसके बाद अब ममता सरकार से भी सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या हिन्दू बंगाल के निवाी नहीं हैं, क्या ममता को सिर्फ मुसलमानों की चिंता है, कब तक बंगाल में हिन्दुओं की हत्या होती रहेगी और ममता सरकार खामोश बैठी रहेगी?
हिन्दू परिवार ने छोड़ा बंगाल
मुर्शिदाबाद हिंसा में बीते जुमे के दिन मुस्लिम भीड़ ने पूरे इलाके में हमला कर दिया था, जिसमें हिन्दुओं के घरों को निशाना बनाया गया था. इसी हत्यारी भीड़ के हाथों जान गंवाने वाले पिता-पुत्र गोविंद दास और चंदन दास का परिवार इस हमले से ऐसा सहमा कि जान बचाने के लिए परिवार के 13 लोगों ने बंगाल ही छोड़ दिया है. ये सभी लोग किसी तरह से जान बचा कर झारखंड पहुंचे हैं. जहां साहिबगंज के राजमहल में इन लोगों ने शरण ले रखी है.
परिवार ने बताया कैसा था आतंक
झारखंड पहुंचे इस 13 सदस्यीय परिवार ने मुर्शिदाबाद का आतंक जब कैमरे के सामने साझा किया तो वहां मौजूद हर इंसान सहम गया. परिवार ने बताया कि 12 अप्रैल को गोविंद (72) और चंदन (40) मुर्शिदाबाद में नाश्ते के दुकान चलाते थे. उस दिन वो दोनों दुकान पर ही थे, सुबह लगभग 11 बजे के आसपास की बात होगी, करीब 500 से ज्यादा उपद्रवी दुकान पर पहुंच जाते हैं. दोनों पिता-पुत्र को दुकान से खींच लेते हैं, और अपने पास मौजूद धारदार हथियारों से उनका बड़ी ही बेरहमी से कत्ल कर दिया जाता है. ये हमलावर यहां नहीं रुके, इसके बाद बाजार की सभी दुकानों में मौजूद लोगों के साथ मारपीट करते हैं, दुकानों में तोड़फोड़ करते हैं, और फिर आसपास के घरों पर पहुंच जाते हैं. और करीब 70-80 घरों में तोड़फोड़ ही नहीं करते बल्कि महिलाओं के साथ बदतमीजी भी करते हैं.
इसी आतंक को दखने और अपनों को खोने के बाद दास परिवार ने बंगाल छोड़ना ही बेहतर समझा, और सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए झारखंड पहुंच गए हैं. बंगाल में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा ने अब ममता सरकार पर भी सवाल खड़े कर दिये हैं. क्योंकि पहले मुर्शिदाबाद फिर 24 परगना हर जगह दंगाई जमकर माहौल बिगाड़ रहे हैं. लेकिन सरकार इन पर नकेल कसने में नाकामयाब रही है.