नई दिल्ली: भयंकर ठंड और कोहरे के बीच देर रात ग्रेटर नोएडा में लगभग दो घंटे तक एक भयानक मौत का नजारा देखने को मिला. एक बेबस पिता, स्थानीय लोग, अधिकारी और रेस्क्यू टीमें सब मौजूद थे, लेकिन 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे को डूबते हुए देखते रहे. अपने डूबते ग्रैंड विटारा कार की छत पर खड़े युवराज मेहता लगातार चिल्ला रहा था, ''पापा, बचाओ''.
रेस्क्यू टीमों ने पानी में जाने से किया इनकार
घने कोहरे को कारण बताकर रेस्क्यू टीमों ने उस 20 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में जाने से इनकार कर दिया, जिसमें कार गिरी थी. यह बेहद हैरान करने वाली और चौंकाने वाली बात है, क्योंकि एक डिलीवरी एजेंट ने उसी कोहरे और हालात में युवराज को बचाने की कोशिश की. इस त्रासदी ने लापरवाही और तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जगह को लेकर कई बार की गई थी शिकायत
खास बात यह है कि नोएडा अथॉरिटी को इस हादसे वाली जगह के खतरनाक होने की कई शिकायतें पहले मिल चुकी थीं, लेकिन उन्होंने इलाके को सुरक्षित करने या क्षतिग्रस्त बैरिकेड्स ठीक करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की. हादसा शनिवार को करीब 12:20 बजे हुआ, जब युवराज की कार क्षतिग्रस्त दीवार तोड़कर गड्ढे में गिर गई. खबर फैलते ही उसके पिता राजकुमार मेहता और पुलिस, फायर ब्रिगेड व एसडीआरएफ के लगभग 80 जवान मौके पर पहुंच गए.
कार की छत पर 2 घंटे तक खड़ा रहा युवराज
गवाहों के अनुसार, अधिकारियों के बीच यह बहस चलती रही कि रेस्क्यू शुरू करें या नहीं. इस दौरान युवराज अपनी डूबती कार की छत पर लगभग दो घंटे तक खड़ा रहा और बार-बार मदद की गुहार लगाता रहा. उसका पिता गड्ढे के किनारे पर खड़ा बेबस देखता रहा. आपातकालीन टीमों ने जोखिम का आकलन किया और पानी में उतरने से मना कर दिया. कारण बताया गया कि घना कोहरा, जमने वाली ठंड और पानी के नीचे लोहे की छड़ें, जिससे रेस्क्यू बहुत खतरनाक हो जाता.
हादसे के चार घंटे बाद निकाला गया शव
युवराज के आखिरी शब्द थे. ''पापा मदद करो. मैं मरना नहीं चाहता.'' उसकी चीखें करीब 1:45 बजे थम गईं, और यहीं उसकी त्रासदी का अंत हो गया. रेस्क्यू टीमें वहीं खड़ी रहीं, लेकिन युवराज महज कुछ मीटर दूर डूब गया. हादसे के चार घंटे से ज्यादा बाद उसका शव बाहर निकाला गया. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, मौत का कारण दम घुटना बताया गया है, यानी सांस रुकने से मौत हुई. इसमें कार्डियक फेलियर को भी सहायक कारक माना गया है.
डिलीवरी एजेंट ने की जान बचाने की कोशिश
युवराज के डूबने के कुछ ही मिनट बाद डिलीवरी एजेंट मोनिंदर मौके पर पहुंचा. उसने अधिकारियों की सुस्ती देखी और खुद कूदने का फैसला किया. हालांकि उसकी कोशिश नाकाम रही, लेकिन गवाहों ने उसकी बहादुरी की तारीफ की. मोनिंदर ने बताया, ''मैं करीब 1:45 बजे पहुंचा, तब तक युवराज 10 मिनट पहले ही डूब चुका था. मैंने देखा कि एसडीआरएफ के जवान सीढ़ी पर बैठे थे. वे कह रहे थे कि पानी बहुत ठंडा है और अंदर लोहे की छड़ें हैं, इसलिए वे नहीं उतरेंगे.''
उसने आगे कहा, ''मैंने उनसे कहा कि मुझे हट जाओ, मैं जाता हूं. उन्होंने पूछा क्या मैं तैर सकता हूं और कॉन्फिडेंट हूं. मैंने हां कहा. मैंने कपड़े उतारे, कमर में रस्सी बांधी और गड्ढे में कूद गया. करीब 30 मिनट तक पानी में तलाश की, लेकिन न कार मिली न युवराज.'' वह सुबह करीब 5:30 बजे तक वहीं रहा, तब तक भी अधिकारी कार या शव नहीं निकाल पाए थे.
मोनिंदर ने कहा, ''सरकारी विभाग इसके जिम्मेदार हैं.'' मीडिया से बातचीत में मोनिंदर ने कहा कि पुलिस टीम में बुजुर्ग सदस्य भी थे और उनके पास कोई तत्काल इमरजेंसी उपकरण नहीं था. फायर ब्रिगेड के पास सेफ्टी जैकेट और रस्सी थी, लेकिन वे हिले नहीं. जब मैंने मदद की पेशकश की, तो उन्होंने मुझे जाने दिया. मेरे अलावा किसी ने हिम्मत नहीं की.
मोनिंदर ने नोएडा अथॉरिटी को ठहराया जिम्मेदार
उन्होंने कहा कि यह इलाका इतना खतरनाक है कि कोहरे में कोई अनजान व्यक्ति आसानी से गिर सकता है. वहां कोई दीवार भी नहीं है जो गाड़ी रोक सके. गड्ढा पूरी तरह खुला है. महज 15 दिन पहले भी ऐसा ही हादसा हुआ था, और मैंने उस ड्राइवर को बचाया था. युवराज के पिता राजकुमार मेहता, जो अपने बेटे को चीखते हुए देखते रहे, ने आरोप लगाया कि मौके पर ज्यादातर लोग बस देख रहे थे और वीडियो बना रहे थे.
युवराज के पिता ने मीडिया को क्या बताया...
युवराज के पिता ने कहा, ''मेरा बेटा खुद को बचाने की कोशिश कर रहा था. हर फोन कॉल पर वह कहता रहा, 'पापा बचाओ, पापा बचाओ'. वह 'हेल्प, हेल्प' चिल्ला रहा था ताकि आसपास के लोग सुनें, लेकिन ज्यादातर भीड़ बस देख रही थी. कुछ लोग वीडियो बना रहे थे.'' उन्होंने कहा कि कोहरे के कारण दिखाई बहुत कम दे रहा था और वे बेटे की कार ढूंढने में भी परेशान हुए. पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ मौजूद होने के बावजूद कोई तत्काल रेस्क्यू नहीं हुआ. पिता का कहना है कि अगर समय पर ट्रेंड डाइवर्स लगाए जाते तो बेटा बच सकता था.
अधिकारियों की निष्क्रियता की व्यापक आलोचना
इस घटना पर अधिकारियों की निष्क्रियता की व्यापक आलोचना हुई है. नोएडा अथॉरिटी के एडिशनल सीईओ सतीश पाल ने कहा कि मामला जांच के अधीन है और एक जूनियर इंजीनियर को हटा दिया गया है. लापरवाही के आरोपों की जांच के बाद ही पता चलेगा. जांच पूरी होने पर जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाएगा. बिल्डर का बकाया है और केस भी चल रहा है.
एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने कहा- 'हमने हर संभव कोशिश की'
एडिशनल पुलिस कमिश्नर राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि परिवार की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है. हमने हर संभव कोशिश की. एसडीआरएफ भी मौके पर था, लेकिन विजिबिलिटी लगभग शून्य थी. जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी. यह हादसा इमरजेंसी सेवाओं की तैयारियों और रिस्पॉन्स पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है.