नई दिल्ली: डेमोग्राफी चेंज यानि जनसंख्या में तेजी से बदलाव होना, कितना बड़ा खतरा है, इसे समझने के लिए महाराष्ट्र से आए 5 सबूत आपको देखने चाहिए. कैसे एक नई नवेली इस्लामी पार्टी ने मालेगांव में बड़ी कहानी गढ़ दी, जो लोग ओवैसी के बयान का मजाक बना रहे थे कि हिंदुस्तान में एक दिन हिजाब वाली पीएम बनेगी, वो भी इन सबूतों को देखकर दंग रह जाएंगे.

सबूत नंबर 1: मालेगांव में इस्लाम पार्टी ने जीती सबसे ज्यादा सीटें... ये हैं आसिफ शेख रशीद, जिन्होंने शरद पवार की पार्टी NCP से अलग होकर पार्टी बनाई, नाम रखा इस्लाम पार्टी...और मालेगांव नगर निकाय चुनाव में उतरे तो ओवैसी की AIMIM ने इन्हें हल्के में लिया...पर आसिफ शेख ने वहां के मुस्लिम वोटर्स को लुभाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी...नतीजा मालेगांव नगर निगम की कुल 84 में से 35 सीटें जीतकर इनकी इस्लाम पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनी..दूसरे नंबर पर 21 सीटों के साथ ओवैसी की AIMIM रही, जबकि बीजेपी को यहां सिर्फ 2 सीटें मिल पाईं...
यानि पूरी तरह से बीजेपी का सपना यहां टूट गया...यहां तक कि जो कांग्रेस तुष्टिकरण के चक्कर में मंदिरों का विरोध करती है, उसे भी सिर्फ तीन सीटें यहां मिल पाईं...तो क्या यही वजह है कि मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर असम में हिमंता बिस्वा सरमा ने बीजेपी का उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला लिया है....हालांकि ख़बर है वो सहयोगी पार्टी के उम्मीदवारों को यहां सपोर्ट करेंगे....अब जिसकी जितनी संख्या है, वो वहां जीत सकता है, पर दूसरा सबूत और चौंकाने वाला है...
सबूत नंबर 2: गोवंडी में ओवैसी का क्लीन स्वीप. ये वो जगह है, जहां समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी का गढ़ रहा है...पर ओवैसी ने यहीं से निकाय चुनाव के प्रचार की शुरुआत कर ये संदेश दिया था कि इस बार बदलाव होगा... और जब नतीजे आए तो ओवैसी की पार्टी ने सभी 6 सीटें जीत ली.... अगर ऐसे ही ओवैसी की पार्टी मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाती रही तो सोचिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का क्या हाल होने वाला है... क्योंकि ये तो सिर्फ ट्रेलर है, ओवैसी की पार्टी ने महाराष्ट्र निकाय चुनाव में एक नया इतिहास भी रचा है...
सबूत नंबर 3: ओवैसी की पार्टी, 126 सीटों पर पहुंची. ओवैसी की जो पार्टी पहले महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में सिमटी हुई थी, वो अब मराठवाड़ा से निकलकर विदर्भ, उत्तर महाराष्ट्र और मुंबई महानगर तक अपना वर्स्चव दिखा रही है...और कुल 126 सीटें ओवैसी की पार्टी ने डेमोग्राफी चेंज और अपने वादों के आधार पर जीत ली... जिसमें सबसे ज्यादा 33 सीटें छत्रपति संभाजीनगर में जीती...
सबूत नंबर 4: हिंदू बाहुल्य इलाके में फहीम की बीवी जीती. जिस फहीम शमीम पर नागपुर में हिंसा फैलाने का आरोप लगा, उसकी बीवी आलीशा नागपुर में चुनाव जीत जाती है...वो भी हिंदू बाहुल्य इलाका होने के बावजूद, जहां हिंदुओं को पहले निशाना बनाया गया था, वहां का हिंदू क्या डरकर वोट देने ही नहीं निकला, ये भी सवाल फहीम की बीवी के चुनाव जीतने के बाद गूंजने लगे हैं....
पर ये सब एक ट्रेलर है, आप कल्पना कीजिए, आने वाले कुछ सालों में जिन-जिन इलाकों की डेमोग्राफी बदल रही है, चाहे वो झारखंड के आदिवासी इलाके हों या असम-बंगाल के क्षेत्र या फिर महाराष्ट्र के इलाके...वहां किस हिसाब से जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे, हिंदू वोट थोड़ा भी इधर-उधर हुआ तो कैसे इस्लाम पार्टी और इस तरह की राजनीति करने वालों को इसका फायदा मिलेगा...लोकतंत्र के लिहाज से चुनाव कोई भी लड़ सकता है और जीत सकता है, लेकिन डेमोग्राफी चेंज का खतरा बड़ा है...शायद यही वजह है कि बार-बार बीजेपी के बड़े-बड़े नेता इसके प्रति सबको आगाह कर रहे हैं, जबकि ओवैसी इससे एक कदम आगे मुस्लिम आबादी को एकजुट करने और हिजाब वाली बेटी को प्रधानमंत्री का सपना को हकीकत में बदलने के लिए लग चुके हैं...