राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन में कुछ ऐसा कहा, जिससे राज्यसभा में जमकर विवाद हुआ। अपने भाषण में मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में 152 पेपर लीक हो चुके हैं। सरकार युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने में नाकाम रही है।
खरगे ने सदन में आरोप लगाया कि शैक्षणिक संस्थानों पर आरएसएस का कब्जा हो चुका है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और अधिकारों पर कुछ लोगों का विशेषाधिकार है। वह कहते हैं कि जीडीपी का 6 फीसदी हिस्सा शिक्षा पर खर्च होना चाहिए, लेकिन 3 फीसदी ही खर्च हो रहा है। इसके कारण दलित और गरीब शिक्षा से वंचित हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मनुस्मृति का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की नीतियां उन्हें मनुस्मृति की याद दिलाती हैं।
मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन में नए सिलेबस को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सिलेबस में आपत्तिजनक चीजें आ रही हैं। उन्होंने इसे आरएसएस का सिलेबस बताया और आपत्तिजनक सामग्री को पाठ्यक्रम से हटाने की मांग की।
मल्लिकार्जुन खरगे के मनुस्मृति वाले बयान पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पलटवार किया और कहा कि खरगे का बयान तथ्यों से परे है। इससे समाज में अशांति पैदा होगी। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे से मूल प्रति दिखाने की मांग की। इसके बाद राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने डॉ. अंबेडकर और अन्य किताबों को उद्धृत किया तथा मल्लिकार्जुन खरगे से तथ्यों को प्रमाणित करने को कहा।