नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचाने वाले टीएमसी से निकाले गए विधायक हुमायूं कबीर ने बीजेपी को गठजोड़ का प्रस्ताव दिया है, लेकिन इसके लिए उन्होंने एक अनोखी मांग रखी है. कबीर का कहना है कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री पद का आश्वासन मिले, तो वे बीजेपी के साथ हाथ मिलाने को राजी हैं. ध्यान देने वाली बात है कि पिछले साल के अंत में टीएमसी द्वारा निलंबित किए जाने के बाद कबीर ने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी शुरू की, जिसका नाम 'जनता उन्नयन पार्टी' (जेयूपी) है.
शुक्रवार को उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी अगर उन्हें सीएम पद के लिए भरोसा दे, तो वे गठबंधन पर विचार कर सकते हैं. इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस, सीपीआई-एम और आईएसएफ से भी साझेदारी की अपील की है, हालांकि इन दलों से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. कबीर ने आगे कहा कि यदि बीजेपी सत्ता में आती है और उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का वादा करती है, तो वे तैयार हैं.
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर उनकी पार्टी को 100 सीटें मिलें और बीजेपी को 90, तो सीएम कौन होगा? इस संदर्भ में उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का हवाला दिया. कबीर के इन बयानों पर टीएमसी के पदाधिकारियों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे शुरू से ही कबीर को बीजेपी की 'बी-टीम' मानते आए हैं.
कबीर की बातों का जवाब देते हुए बीजेपी नेता जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि उनकी पार्टी कभी किसी सांप्रदायिक सोच वाले व्यक्ति से गठबंधन नहीं करेगी, जिसने पहले हिंदुओं को मारकर उनके शव भागीरथी नदी में फेंकने जैसी बातें कही हों.
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अल्पसंख्यक समुदाय का बीजेपी पर विश्वास बढ़ना सकारात्मक है. दिसंबर के अंतिम सप्ताह में कबीर ने अपनी नई पार्टी की स्थापना की घोषणा की और 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए कई प्रत्याशियों के नाम भी बताए. पश्चिम बंगाल में मार्च-अप्रैल के आसपास चुनाव होने की संभावना है, जहां सत्ताधारी टीएमसी लगातार चौथी जीत की कोशिश में होगी. मुख्य लड़ाई टीएमसी और बीजेपी के बीच मानी जा रही है.