
ये तस्वीर साल 1979 की है, ये वही मस्जिद है, जहां से ईरान को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का मूवमेंट शुरू हुआ, तब ईरान में पारसी और ईसाइयों की संख्या ठीक वैसी ही थी, जैसे आज हिंदुस्तान में 100 करोड़ हिंदुओं पर 25 करोड़ मुसलमान और कई करोड़ दूसरे धर्मों के लोग हैं. ठीक 45 साल बाद इसी मस्जिद से ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई ने फिर इजरायल को मिटाने का ऐलान किया है. और अगर दुनिया के नक्शे से इजरायल मिट गया, तो पूरी दुनिया में इस्लामिक राष्ट्र स्थापित होने में वक्त नहीं लगेगा. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि वो रिपोर्ट कौन सी है, जो भारत में तेजी से वायरल हो रही है, और रिपोर्ट पढ़ने के दौरान हर इंसान के जुबान पर एक ही शब्द आ रहा है, वो है योगी आदित्यनाथ. आज उस सवाल का जवाब मिल जाएगा, जब ये कहा जाता है योगी क्यों हैं जरूरी?
बिहार के फुलवारीशरीफ से PFI के कुछ ऐसे लोग पकड़े गए थे, जिनसे पूछताछ में NIA को मिशन इस्लामिक राष्ट्र का पता चला. वहां से कुछ किताबें भी मिली थी, और ऐसी ही किताबें महाराष्ट्र एटीएस के भी हाथ लगी. लेकिन अब उसकी तस्वीर भी समूचे हिंदुस्तान के सामने है. ईरान में हिजबुल्लाह चीफ की मौत के बाद भारत के अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन हुए, फिलीस्तीन के संकट को भारत के कुछ मुसलमानों ने पीओके से भी बड़े संकट के तौर पर दिखाया.
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर एक मुस्लिम की आवाज नहीं निकली, लेकिन हिजुबुल्लाह चीफ नसरुल्लाह की मौत के बाद हिंदुस्तान के कई मुस्लिम आंसू बहा रहे हैं. इसका मतलब ये है कि अरब के देशों में जो कुछ हो रहा है, उसका असर हिंदुस्तान पर पड़ रहा है. अगर हिंदुस्तान में मुस्लिमों की आबादी अगले कुछ दशक में 40-50 करोड़ हो जाती है, तो 1979 में ईरान में हुए इस्लामिक मूवमेंट की तरह भारत में आंदोलन खड़ा हो सकता है. अब जरा इस मस्जिद की कहानी समझिए. जिस मस्जिद में लाखों ईरानी मुसलमान अपने नेता खामनेई को सुन रहे हैं, उसी मस्जिद से ईरान के संकट को टालने के लिए बार-बार ऐलान किया जाता है.
भारत में भी जब कुछ भी होता है तो कई घटनाओं में मस्जिद से ही ऐलान किए गए. इसिलिए सरकार वक्फ बोर्ड पर कंट्रोल चाहती है, अवैध मस्जिद, मजार, मदरसों की सूची बन रही है, मुसलमानों की संख्या और उनकी पहचान करने के लिए एनआरसी जैसा कानून लागू हो रहा है. बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल के बॉर्डर पर बेहद सख्ती से बीएसएफ निपट रही है, लेकिन भारत की संसद में अगर कोई कड़े कानून नहीं आए तो भारत की तस्वीर ईरान जैसे हो सकती है. क्योंकि हजारों की संख्या में हमारे आपके बीच रहने वाले देश विरोधी ताकतें पनप रही हैं, इन ताकतों को ये भी पता है योगी-मोदी के रहते ये सपना कभी पूरा नहीं होगा, इसीलिए 2014 में ही मोदी की रैली में बड़ी साजिश पटना में रची गई, और योगी को भी बराबर निशाने पर रखा जाता है, इसी बात को समझते हुए धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री बार-बार हिंदू राष्ट्र की बात कर रहे हैं.