नई दिल्ली: भारत के विदेशी कर्ज को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया है कि वर्ष 2014 से 2026 के बीच देश का विदेशी कर्ज लगभग तीन गुना हो गया है.
पार्टी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 2014 में भारत पर विदेशी कर्ज 26.76 लाख करोड़ रुपये था, जो 2026 में बढ़कर 72.15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. कांग्रेस द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 2015 में विदेशी कर्ज 29.71 लाख करोड़, 2016 में 32.17 लाख करोड़, 2017 में 30.55 लाख करोड़, 2018 में 34.41 लाख करोड़, 2019 में 37.54 लाख करोड़, 2020 में 41.97 लाख करोड़, 2021 में 41.92 लाख करोड़, 2022 में 47.00 लाख करोड़, 2023 में 51.29 लाख करोड़, 2024 में 55.75 लाख करोड़, 2025 में 63.00 लाख करोड़ और 2026 में 72.15 लाख करोड़ रुपये बताया गया है.
इन आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत का विदेशी कर्ज लगातार बढ़ता गया है और सरकार को इस बढ़ोतरी के कारणों पर देश के सामने जवाब देना चाहिए. पार्टी का कहना है कि बढ़ता विदेशी कर्ज आने वाले समय में अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है.
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से कांग्रेस के इन दावों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. यह भी उल्लेखनीय है कि विदेशी कर्ज के आंकड़ों का आकलन विनिमय दर, सरकारी और निजी क्षेत्र के बाहरी ऋण तथा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) जैसे कई आर्थिक मानकों के आधार पर किया जाता है. ऐसे में इन दावों की पुष्टि आधिकारिक आंकड़ों और स्वतंत्र आर्थिक विश्लेषण के आधार पर की जानी चाहिए.