नई दिल्ली: भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने के अभियान में तेजी से आगे बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान ऑस्ट्रेलिया ने तमिलनाडु के प्राचीन मंदिरों से चोरी हुई तीन महत्वपूर्ण धार्मिक कलाकृतियां भारत को लौटाने की घोषणा की है. इनमें भद्रकाली वाला धातु त्रिशूल, नंदी की ग्रेनाइट प्रतिमा और 6 मुख वाले कार्तिकेय की पत्थर की मूर्ति शामिल है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 से अब तक 640 से अधिक प्राचीन वस्तुएं विभिन्न देशों से वापस लाई जा चुकी हैं. आजादी के बाद 2014 तक केवल 13 कलाकृतियां ही वापस आ सकी थीं, लेकिन पिछले दशक में यह संख्या बढ़ी है. अब तक कुल 650 से ज्यादा चोरी हुई कलाकृतियां भारत पहुंच चुकी हैं.
ऑस्ट्रेलिया बना प्रमुख साझेदार
ऑस्ट्रेलिया भारत की सांस्कृतिक धरोहर वापसी में अग्रणी रहा है. 2014 में तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने दो चोलकालीन मूर्तियां लौटाई थीं. 2022 में 29 प्राचीन वस्तुएं वापस की गईं. अब तीन और कलाकृतियों की वापसी हो रही है. अमेरिका से सबसे ज्यादा कलाकृतियां वापस आई हैं. 2016 में 200, 2021 में 157 और 2024 में 297 वस्तुएं लौटाई गईं. कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और सिंगापुर जैसे देशों ने भी भारतीय मूर्तियां और शिल्प वापस किए हैं.
कैसे होती है वापसी?
भारत पुरातत्व सर्वेक्षण, मंदिर अभिलेखों, पुरानी तस्वीरों और कानूनी दस्तावेजों के आधार पर चोरी हुई कलाकृतियों की पहचान करता है. अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों और कूटनीतिक प्रयासों से इन्हें वापस लाया जाता है. ज्यादातर कलाकृतियां तमिलनाडु के चोलकालीन मंदिरों से चुराई गई थीं. यह अभियान भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसकी गरिमा को विश्व पटल पर पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.