तेजस्वी यादव: अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर तेजस्वी यादव ने बिहार की एनडीए सरकार और केंद्र की नीतियों की कड़ी आलोचना की. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए राज्य से बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन और दूसरे राज्यों में बिहारियों के साथ होने वाले व्यवहार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश के निर्माण में मजदूरों की भूमिका सबसे अहम है, लेकिन उनके विकास और बिहार की प्रगति पर गंभीर चर्चा का अभाव चिंता का विषय है.
हर साल बड़े पैमाने पर पलायन का दावा
तेजस्वी ने मजदूर दिवस की शुभकामनाओं के साथ अपनी बात शुरू की और कहा कि पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से लागू नीतियों के कारण हर साल करोड़ों लोग रोजगार की तलाश में बिहार छोड़ने को मजबूर हैं. उनका आरोप है कि ये नीतियां गरीबों के हित में नहीं हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर मजदूर और उनके परिवार आगे नहीं बढ़ते, तो “विकसित भारत” की बात करना खोखला साबित होता है.
बिहारियों को दूसरे राज्यों में मुश्किलें
दिल्ली में बिहार के एक युवक की हत्या और प्रवासी मजदूरों की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों को बाहर जाकर कभी अपमान तो कभी हिंसा का सामना करना पड़ता है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नोटबंदी, लॉकडाउन और गैस संकट जैसी परिस्थितियों में सबसे ज्यादा असर बिहार के मजदूरों पर पड़ा है, और उनकी घर वापसी की स्थिति पूरे देश ने देखी है.
‘श्रमिक प्रदेश’ नाम रखने पर तंज
बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए तेजस्वी ने कहा कि पार्टी नाम बदलने में माहिर है, इसलिए वह बिहार का नाम ही ‘श्रमिक प्रदेश’ रख दे. उनका कहना था कि जहां एक तरफ राज्य औद्योगिक उत्पादन में पीछे रह गया है, वहीं मजदूर उपलब्ध कराने में आगे है. उन्होंने ‘श्रमिक दिवस’ का नाम बदलकर ‘बिहार समर्पण दिवस’ करने का भी व्यंग्यात्मक सुझाव दिया.
रोजगार संकट और मजदूरों की वापसी
तेजस्वी ने यह भी कहा कि गैस सिलेंडर की समस्या के चलते कई मजदूर वापस बिहार लौट रहे हैं, लेकिन उनके रोजगार के लिए राज्य में ठोस व्यवस्था नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बिहार के लोग बाहर काम करने नहीं जाएंगे, तो दूसरे राज्यों के उद्योग कैसे चलेंगे. अंत में उन्होंने सभी से अपील की कि बिहार से पलायन रोकने और मजदूरों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं.