Iqra Hasan: इकरा हसन अचानक से बदली-बदली क्यों दिखाई दे रही हैं, पहले जो इकरा सिर्फ लोगों की समस्याएं सुनती थीं, अब अस्पताल में छापा भी मारती हैं, यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल भी खोलती हैं, चुनाव बेशक 2027 में होना है, लेकिन मई 2025 से ही इकरा ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है, और अपने लोगों को खुलकर ये कह रही हैं कि 10 साल से हम सत्ता से दूर हैं, सत्ता में आने के लिए कुछ करना होगा, तो आखिर वो प्लानिंग क्या है, उनके 60 सेकेंड के बयान में बड़ी रणनीति छिपी है, क्या इकरा हसन के रूप में समाजवादी पार्टी को दूसरे आजम खान और इरफान सोलंकी जैसा नेता मिल गया है, और 2024 में जैसे अखिलेश के PDA ने बड़ा झटका दिया, क्या वैसे ही इकरा का ये फॉर्मूला भी हिट हो सकता है.
इकरा अपने लोगों को समझाती हैं लड़ाई-झगड़े से दूर रहना है, हिंदू-मुस्लिम के नाम पर उलझना नहीं है, तो क्या 2027 का चुनाव हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे पर होने वाला है, या फिर मुस्लिम बाहुल्य सीटें जैसे रामपुर और कुंदरकी सपा के हाथ से खिसकी, उसका डर सभी मुस्लिम नेताओं को सता रहा है, इकरा हसन वैसे तो कैराना से सांसद हैं, और इनका कार्यकाल 2029 तक है, लेकिन इनके भाई नाहिद हसन जो सपा से विधायक हैं, वो साल 2027 के सियासी मैदान में फिर से दावा ठोंक सकते हैं, और इकरा की ये प्लानिंग शायद ये भी हो कि जैसे 2022 में भाई को प्रचार कर जीताया, वैसे ही 2027 में भी जीताना होगा, लेकिन इकरा हसन क्या अकेले अखिलेश यादव को सीएम बना पाएंगी, जरा इस गणित को समझिए.
जिनका जवाब योगी सरकार को चुनावी सीजन शुरू होने से पहले सिलसिलेवार तरीके से जनता के सामने रखना होगा, इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर का राजनीतिक नफा—नुकसान कितना होगा, ये भी बड़ा सवाल बरकार है, क्योंकि जैसे ही ये ख़बर सामने आई कि योगी सरकार अब सभी बहन-बेटियों को शादी में सिंदूरदानी देगी, नेहा सिंह राठौर जैसे लोग ये कहने लगे कि भाजपा वाले सिंदूर लेकर आएं तो दरवाजा बंद कर लीजिएगा, क्योंकि सिंदूर तो सिर्फ पति का दिया हुआ ही लगाया जाता है.
जिससे एक बात तो साफ है कि सपा और कांग्रेस की तैयारी बड़ी है, अखिलेश जो जातियों का मुद्दा बार-बार उठा रहे हैं, वो भी चुनाव में उनकी मदद कर सकता है. पर कानून-व्यवस्था के मामले पर खासकर बुलडोजर मॉडल वाली नीति जो कई राज्यों ने लागू की, वहां योगी को चुनौती अखिलेश दे पाएंगे, ये मुश्किल ही लगता है. फिर इकरा हसन किस आधार पर ये दावा कर रही हैं कि 2027 में अखिलेश को सीएम बनाएंगे, सपा की सत्ता वापस लाएंगे. क्या सपा ने कोई अंदरुनी सर्वे करवाया है, या फिर ये महज बयानबाजी भर है.
आगे क्या होगा कोई नहीं जानता, लोकतंत्र में सरकार चुनने का हक जनता का है, नेता सिर्फ वादे और दावे कर सकते हैं, ऐसे में इकरा हसन की इस भविष्यवाणी में आपको कितना दम दिखता है, सोचिए और जवाब दीजिए. इकरा हसन से एक वर्ग ये सवाल भी पूछ रहा है कि आपके क्षेत्र कैराना से ही नोमान इलाही नाम का जासूस पकड़ा गया, उस पर आपने अब तक एक लफ्ज क्यों नहीं कहा, क्या इकरा हसन को आगे आकर ये नहीं कहना चाहिए था कि ऐसे सभी संदिग्धों की जांच होनी चाहिए. क्या इकरा हसन को ओवैसी के रास्ते पर चलना चाहिए, या फिर वो खुद को आजम खान की तरह बड़ा नेता बनते देखना चाहती हैं. सियासत हो या सामान्य जीवन तरक्की की महत्वकांक्षा हर कोई रखता है, किसी को देर तो किसी को जल्दी मिल जाती है, लेकिन इकरा का ये बयान बता रहा है, अखिलेश उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी चुनावी दौर में दे सकते हैं.