ईरानी राष्ट्रपति की मौत के बाद इंडिया-अमेरिका में बुलाई गई इमजरेंसी मीटिंग!

Global Bharat 20 May 2024 04:09: PM 3 Mins
ईरानी राष्ट्रपति की मौत के बाद इंडिया-अमेरिका में बुलाई गई इमजरेंसी मीटिंग!

19 मई की शाम 7 बजे ईरान के राष्ट्रपति का हेलीकॉप्टर लापता हो गया था, जिसके करीब 15 घंटे बाद खबर आती है कि ईरान के राष्ट्रपति रईसी और विदेश मंत्री नहीं रहे. उनके साथ देश के कई बड़े अधिकारियों की भी इस हादसे में मौत हो गई. लेकिन सवाल ये है कि ईरान जैसे ताकतवर मुल्क के राष्ट्रपति का हेलीकॉप्टर क्या कोई खिलौने की तरह था, जो अचानक से क्रैश हो गया.

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की जब भी यात्रा होती है तो हेलीक़ॉप्टर या विमान पहले चेक किए जाते हैं. अगर एक पहिए में भी खराबी होती है तो तुरंत उसे ठीक किया जाता है. यात्रा लेट हो तो हो पर सुरक्षा में चूक नहीं होती. फिर सवाल है कि रईसी की सुरक्षा में लगे अधिकारी ऐसा क्यों नहीं कर पाए. क्या रईसी के बीच ही कोई विभीषण बैठा था जो सारी जानकारी दुश्मनों तक पहुंचा रहा था.

वहीं ईरान के मीडिया हाउस ये नहीं लिखता कि रईसी की मौत हुई है, बल्कि वो लिखता है कि रईसी मारे गए हैं. इसका मतलब आप साफ समझ सकते हैं वहां तगड़ी जांच शुरू हो चुकी है और जो भी शामिल होगा, उसे वहां के कानून के हिसाब से सजा मिलेगी. लोग ये समझ चुके हैं कि रईसी के साथ जो हुआ वो सामान्य क्रैश नहीं था. इसे पूरी प्लानिंग के तहत लगता है करवाया गया था.

इत्तेफाक ये है कि कुछ दिनों पहले ईरान के राष्ट्रपति रईसी पाकिस्तान गए थे, तब शहबाज शरीफ ने उनके आगे हाथ फैलाया था. पर रईसी ये कहकर लौट गए थे कि हम आपकी मदद नहीं कर पाएंगे. कोई खास बात नहीं बनी थी, जिसके बाद पाकिस्तान के आतंकी एक नया प्लान बनाने में लगे थे. शुरू से भी ईऱान और पाकिस्तान के रिश्ते ज्यादा अच्छे नहीं रहे हैं, पर अभी जिस हालत में पाकिस्तान है. वो कुछ ऐसा करेगा, इसकी आशंका किसी को नहीं है, पर बिना पाकिस्तान की मदद के दुनिया में कुछ ऐसे कांड हो जाएं, ये कहना भी मुश्किल है. 

रईसी जिस हेलीकॉप्टर में सवार थे, उसका नाम था BELL 212, जो एक अमेरिकी कंपनी बनाती है. इसमें कुल 14 लोग बैठ सकते हैं. मीडियम आकार का दो इंजन वाला ये हेलीकॉप्टर होता है. आम तौर पर इससे सेना के जवान और सिविलियन उड़ान भरते हैं. तो सवाल उठता है कि रईसी को इसमें बैठने के लिए किसने मजबूर किया. क्या हवा में उड़ने से पहले ही हेलीकॉप्टर में कोई ऐसी गड़बड़ी कर दी गई थी, जिससे इसकी लैंडिंग न हो सके. सवाल कई हैं और जवाब अभी जीरो हैं. हो सकता है ईऱान को इंडिया की भी मदद लेनी पड़े.

अमेरिका से लेकर रूस तक उसे मदद के लिए ऑफर कर रहे हैं, पर हिंदुस्तान में इससे भी एक कदम आगे की तैयारी शुरू होने वाली है. यहां के अधिकारियों के हाथ-पांव इस बात पर फूले हुए हैं कि हम हवा में कैसे ऑपरेशन चलाएंगे. फिलहाल नागरिक उड्डयन मंत्रालय ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास है. देश में जिस हिसाब से पैसेंजर फ्लाइट हादसे का शिकार हो रही है, उसे देखकर कई वीवीआईपी भी टेंशन में हैं.

बीते दिनों एय़र इंडिया की फ्लाइट में अचानक से कुछ ऐसा हुआ कि लोग परेशान हो गए. कभी एय़रपोर्ट की भीड़ तो कभी बीच आसमान में फ्लाइट में खराबी आ जाना लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहा है. ऐसे में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगे जवानों की ड्यूटी और बढ़ जाती है कि वो हर जांच बिल्कुल मुकम्मल तरीके से करें. आपको याद होगा कुछ दिनों पहले गृहमंत्री शाह का हेलीकॉप्टर भी हादसे का शिकार होते-होते बचा था, यानि इंडिया में भी विमानों की सुरक्षा शानदार नहीं है, जिस पर समय रहते ध्यान देना होगा.

ईरान की राष्ट्रपति के बाद हिंदुस्तान, अमेरिका और ब्रिटेन समेत तमाम मुल्कों में इमजरेंसी मीटिंग का दौर शुरू हो चुका है और वहां का हर वीवीआईपी अपने अधिकारी से यही पूछ रहा है कि ईरान के राष्ट्रपति के साथ हुआ वो कैसे हुआ. ऐसी घटना हमारे यहां न हो, इसके लिए कितने पैसे खर्च करने हैं. कहां से एक्सपर्ट बुलाने हैं बताओ, रईसी के साथ जो हुआ उसके लिए खराब मौसम को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है.

जनरल बिपिन रावत के साथ जो हुआ था उस वक्त भी कहा गया था कि मौसम खराब था, तो ये खराब मौसम का क्या कोई फायदा उठा रहा है. मौसम खराब तो कई महीने रहता है और उस दौरान भी नेता आराम से उड़ान भरते हैं. उनका ख्याल रखा जाता है. क्या हवा में कोई ऐसा अदृश्य दुश्मन तैयार हो गया है, जो हिंदुस्तान से लेकर ईरान तक लोगों को निशाना बना रहा है और खुद नजर नहीं आ रहा है.

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