नई दिल्ली: कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता की जंग और तेज हो गई है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की कुर्सी पर डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार की नजरें टिकी हुई हैं, और इसी बीच शनिवार शाम को सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर करीब डेढ़ घंटे की लंबी बातचीत की. इस मुलाकात ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को नई हवा दे दी है.
खड़गे से बातचीत के बाद सिद्धारमैया ने पत्रकारों से कहा कि यह महज एक शिष्टाचार भेंट थी, जिसमें पार्टी संगठन को मजबूत करने, आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और जिला पंचायतों की रणनीति पर चर्चा हुई. उन्होंने साफ लहजे में कहा, "मुख्यमंत्री पद पर बदलाव या कैबिनेट में फेरबदल जैसे मुद्दों पर कोई बात नहीं हुई. ये सब मीडिया की अफवाहें हैं. आखिरकार हाई कमांड ही फैसला लेगी, और चाहे मैं हूं या डीके शिवकुमार, सबको उसका सम्मान करना होगा." उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह अपना पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे और अगले बजट भी पेश करेंगे.
सूत्र बताते हैं कि विदेश यात्रा पर गए लोकसभा विपक्ष के नेता राहुल गांधी 28 नवंबर के बाद दिल्ली लौटेंगे. तब तक केंद्रीय नेतृत्व इस मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठाएगा. उधर, शिवकुमार के समर्थक विधायकों ने दिल्ली में खड़गे से मिलकर दबाव बनाया है. कथित तौर पर 2023 के सत्ता बंटवारे के समझौते के तहत सिद्धारमैया को सिर्फ ढाई साल का समय मिला था, जो नवंबर 2025 तक खत्म हो चुका है. अब शिवकुमार को सीएम बनाने की मांग तेज है.
सिद्धारमैया ने विधायकों के दिल्ली दौरे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें किसी की खबर लेने की जरूरत नहीं, क्योंकि उनके पास खुफिया तंत्र है. उन्होंने खड़गे से शिवकुमार को यह संदेश देने की सलाह दी हो सकती है कि ऐसी चालें पार्टी और सरकार में फूट डालेंगी. दूसरी तरफ, रविवार को शिवकुमार की खड़गे से मुलाकात की संभावना है, जो हालात को और स्पष्ट कर सकती है.
कर्नाटक कांग्रेस के अंदर यह खींचतान अब खुली हो चुकी है. कैबिनेट विस्तार की भी चर्चा चल रही है, लेकिन सिद्धारमैया ने इसे खारिज करते हुए कहा कि विधानसभा की शीतकालीन सत्र के बाद ही कुछ सोचा जाएगा. फिलहाल, हाई कमांड की चुप्पी और दोनों गुटों की जिद से राज्य की राजनीति में तनाव बढ़ता जा रहा है.