नई दिल्ली: भाजपा और कांग्रेस के बीच जवाहरलाल नेहरू को लेकर छिड़ा बाबरी मस्जिद वाला नया विवाद अब संसद परिसर में भी पहुंच गया. गुरुवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने संसद भवन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को वही किताब सौंप दी जिसका जिक्र भाजपा बार-बार कर रही थी.
दरअसल, हाल ही में गुजरात के साधली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने दावा किया था कि आजादी के बाद जवाहरलाल नेहरू सरकारी खजाने से बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के लिए पैसा देना चाहते थे, लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल ने उन्हें साफ मना कर दिया था. भाजपा ने इस दावे को पुख्ता करने के लिए सरदार पटेल की बेटी मणिबेन पटेल की डायरी वाली किताब “Inside Story of Sardar Patel: The Diary of Maniben Patel” का हवाला दिया था और कहा था कि पेज नंबर 24 पर यह बात दर्ज है.
कांग्रेस ने शुरू से ही इस दावे को सरासर गलत और इतिहास के साथ छेड़छाड़ बताया. पार्टी का कहना था कि किताब में नेहरू द्वारा “बाबरी मस्जिद बनवाने” का कहीं कोई जिक्र नहीं है, बल्कि उसमें सिर्फ अयोध्या में एक पुरानी मस्जिद के जीर्णोद्धार की बात है, जिसे सरदार पटेल ने भी ठुकरा दिया था.
अब जयराम रमेश ने इसे और नाटकीय बना दिया. संसद में कार्यवाही शुरू होने से पहले जैसे ही राजनाथ सिंह दिखे, रमेश उनके पास गए और मुस्कुराते हुए मणिबेन पटेल की डायरी के गुजराती अनुवाद के चुनिंदा पन्नों की कॉपी थमा दी. रमेश बोले, “सर, आपके लिए स्पेशल गिफ्ट लाया हूं. मणिबेन पटेल की डायरी का गुजराती ट्रांसलेशन. जरूर पढ़िएगा.”
राजनाथ सिंह ने हल्के से मुस्कुराते हुए पन्ने ले लिए और मजाकिया लहजे में कहा, “अरे, मुझे तो गुजराती आती ही नहीं!” रमेश ने तुरंत जवाब दिया, “कोई बात नहीं सर, हिंदी में भी उपलब्ध है. मैं भेज दूंगा.”
इस छोटी-सी मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. कांग्रेस इसे अपनी बड़ी जीत बता रही है, जबकि भाजपा इसे महज ड्रामा करार दे रही है. फिलहाल राजनाथ सिंह ने इन पन्नों को पढ़ा या नहीं, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि नेहरू को लेकर चल रहा यह विवाद अभी लंबा खिंचेगा.