विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) ने रविवार को कहा कि 2008 में 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों (26/11 Attack) के बाद भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी, लेकिन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उस समय मुंबई में जो हुआ, वैसा नहीं होना चाहिए. आतंकवादी हमला हुआ और कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. जयशंकर (S Jaishankar) ने आगे कहा कि मुंबई भारत और दुनिया के लिए आतंकवाद-रोधी अभियान का प्रतीक है.
उन्होंने कहा कि जब भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य था, तब वह आतंकवाद-रोधी समिति की अध्यक्षता कर रहा था. जयशंकर ने कहा कि हमने आतंकवाद-रोधी पैनल की बैठक उसी होटल में की, जिस पर आतंकवादी हमला हुआ था. लोग जानते हैं कि भारत आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से खड़ा है. हम आज आतंकवाद से लड़ने में अग्रणी हैं. जब हम आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं, तो यह स्पष्ट है कि जब कोई कुछ करता है, तो उसका जवाब दिया जाएगा.
यह पहली बार नहीं है जब जयशंकर ने 16 साल पहले हुए 26/11 आतंकी हमलों के बारे में बात की है, जिसमें 166 लोग मारे गए थे. मुंबई हमलों के बाद, पिछली यूपीए सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) ने लिखा था कि हमने बैठकर चर्चा की. हमने सभी विकल्पों पर विचार किया. जयशंकर ने इस साल अप्रैल में कहा था कि इसके बाद हमने कुछ नहीं करने का फैसला किया और इसका औचित्य यह था कि हमें लगा कि पाकिस्तान पर हमला करने की कीमत, ऐसा न करने से कहीं ज़्यादा है.
तत्कालीन विपक्ष में बैठी भाजपा ने 26/11 मुंबई हमलों के अपराधियों के खिलाफ़ दंडात्मक कार्रवाई न करने के लिए कांग्रेस पर बार-बार हमला किया है. 26 नवंबर, 2008 को पाकिस्तान प्रायोजित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े दस आतंकवादियों ने मुंबई में समन्वित हमले किए. भारतीय धरती पर हुए सबसे भीषण आतंकवादी हमले में कम से कम 166 लोग मारे गए और 300 से ज़्यादा घायल हुए. आतंकवादियों ने मुंबई में ताज पैलेस होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट, नरीमन हाउस और अन्य ठिकानों पर हमले किए. अकेले जीवित बचे आतंकवादी अजमल कसाब को नवंबर 2012 में फांसी दी गई थी.