...ये हैं बिहार के जहानाबाद जिले की डीएम अलंकृता पांडेय, जो काको नगर पंचायत क्षेत्र के मोहल्लों का जायजा लेने पहुंची थीं, जहां डायरिया फैलने की ख़बर है, जगह-जगह गंदगी का अंबार देखते ही डीएम साहिबा भड़क उठती हैं. डीएम मौजूद अधिकारी से कहती कहती हैं, ''दिखवा लेते हैं कह रहे, यहां पर 60-70 केस आने के बाद? अभीतक कहां सोए हुए थे? इतना फियरलेस मत दीखिए, खुद मैं आपको हॉस्पिटल में भर्ती करवा दूंगी, एक मिनट में अक्ल आ जाएगी ठिकाने. पता नहीं चलता, एक ही बात 10-10 बार बोली जा रही है.''
बिहार के जहानाबाद की डीएम अलंकृता पाण्डेय का पारा अचानक हाई हो गया. डायरिया प्रभावित क्षेत्र में सफाई व्यवस्था देखने पहुंची थीं. बदहाली देखकर जमकर फटकार लगायीं.
— Thakur Shaktilochan shandilya (@Ershaktilochan) August 3, 2025
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उसके बाद ठेकेदार की क्लास लगाती हैं, वो साफ कहती हैं, ''5 दिन से यहां समस्या चल रही है, फिर भी मिस्त्री के भरोसे क्यों बैठा है? मिस्त्री से खड़े होकर काम कराने का काम किसका है, ज्यादा बदबू है, रूमाल लगा रहा, बच्चे जो बीमार हो रहे हैं, बदतमीज आदमी, मिस्त्री के भरोसे बैठा है ये, 5 दिन से यहां समस्या चल रही है.'' वहां मौजूद बीडीओ, इंजीनियर सब डीएम साहिबा का रौद्र रूप देखकर हैरान थे. वो पूछती हैं, ''बीडीओ साहब ने जब कहा था तो काम क्यों नहीं हुआ, नौकरी खा जाऊंगी.'' आपके घर के आगे भी गंदगी लगा रहता है, चलिए...ले चलिए वहां भी देख लेते हैं. मुझे गंदगी नहीं चाहिए. बाकी आप ब्लॉक में एक लाइन से सभी टॉयलेट को कवर करते चले जाइए. कहीं पर कूड़ा-कचरा नहीं दिखना चाहिए. कहीं पर कूड़ा-कचरा दिख गया, मैं आपकी नौकरी खा जाऊंगी. समझ गए न? आपको जब बोले थे BDO साहब तो दिन में आकर दो बार आपको देखना चाहिए. प्रोपर सफाई हुआ होता तो ये (कूड़ा) थोड़े ही जम जाता, ये तो फ्लो कर रहा होता.''
यहां से डीएम साहिबा वापस नहीं लौटतीं बल्कि इंजीनियर पर भड़क जाती हैं. वह कहती हैं, ''कोई व्यक्ति कहता है मैडम यहां नल नहीं है, तो सीधा पूछती हैं, ये किसकी जिम्मेदारी है, किसकी नौकरी लेनी है, बता दो. कहां गए PHED? नल लगाना आपके कार्य में नहीं आता है? क्यों नहीं लगा हुआ है? किस कॉन्ट्रैक्टर से पेनाल्टी मैं काटूं? किसकी नौकरी लेनी है, बताइए मुझे? जेई कि या आपकी? यहां पर चार दिन पहले से आकर देख रहे हैं, ये समस्या आपको बताई गई है. आपको अपनी आंखों से देख लेना चाहिए था कि ये मेरा काम है, मैंने अपना काम किया नहीं है. इसके बावजूद मेरे आने तक ये काम कम्प्लीट नहीं हुआ है. इसका क्लियर मतलब है कि आपको कोई मतलब ही नहीं है. आप बिल्कुल फ्री हो गए हैं.''
डीएम साहिबा आगे कहती हैं, ''नल लगवाने में इतना प्रयास करना पड़ता है जी? नल लगवाने में कौन सा प्रयास करना है? इतना बड़ा तो काम नहीं है? समस्या बताइए न? 500 रुपए नहीं है कॉन्ट्रैक्टर के पास तो हमसे ले लीजिए, लगवा दीजिए. पिछले चार दिन में आपलोगों को क्यों नहीं दिखा? इसका जवाब चाहिए. यहां तो आपलोग चार दिन से आ रहे हैं? नहीं आ रहे हैं? खाली फोन पर ही सब बात हो रही है. सोचे होंगे कि जैसे-तैसे कट जाए. इलाज होकर लोग अपने घर चले जाएं. मटिया दें. कौन नल लगवाने के लिए करे. फिर कॉन्ट्रैक्टर पैसा मांगेगा. कॉन्ट्रैक्टर को क्यों नहीं ब्लैकलिस्ट कर दिए आप?''
जी न्यूजी कि रिपोर्ट के मुताबिक अलंकृता पांडेय यूपी के कानपुर की रहने वाली हैं, साल 2014 में इन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की, लेकिन कुछ ऐसे संकट जिंदगी में आए कि डिप्रेशन की वजह से उन्हें बीच में ही तैयारी छोड़नी पड़ी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी बल्कि अगले साल ऑल इंडिया में 85वीं रैंक लेकर आईं, साल 2016 बैच की येIAS ऑफिसर हैं, शुरुआत में इन्हें पश्चिम बंगाल कैडर मिला, उसके बाद बिहार कैड़र मिला. और अब इस वीडियो को लेकर सुर्खियों में हैं.