झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से मानवीय रिश्तों और संस्कारों को शर्मसार करने वाला एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। समथर थाना क्षेत्र में एक बुजुर्ग पिता की मौत के बाद संपत्ति और पुश्तैनी जमीन के बंटवारे को लेकर बेटे और बेटियों के बीच ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि करीब 39 घंटे तक शव घर के आंगन में ही रखा रहा। भाई और बहनों के बीच जमीन के हिस्से को लेकर शुरू हुई कलह इतनी बढ़ गई कि अंतिम संस्कार की सारी रस्में रोक दी गईं। आखिरकार पुलिस प्रशासन और गांव की पंचायत के घंटों चले मान-मनौव्वल और लिखित समझौते के बाद ही पिता की चिता को मुखाग्नि दी जा सकी।
मौत के बाद शुरू हुआ जमीन के बंटवारे का विवाद जानकारी के अनुसार, गांव के बुजुर्ग का लंबी बीमारी और वृद्धावस्था के चलते निधन हो गया था। मौत की खबर पाकर दूर-दराज रहने वाले रिश्तेदार और मृतक की बेटियां भी मौके पर पहुंच गईं। लेकिन अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू होते ही संपत्ति के बंटवारे का मुद्दा गरमा गया। बहनों का आरोप था कि उनके भाई ने पिता की चल-अचल संपत्ति और पैतृक कृषि भूमि पर अकेले कब्जा करने का प्रयास किया है। बेटियों ने दो-टूक मांग रख दी कि जब तक जमीन के हिस्से और उनके वाजिब हक का लिखित फैसला नहीं हो जाता, तब तक शव को श्मशान घाट नहीं ले जाने दिया जाएगा।
घर में रखा रहा शव, पंचायत में होती रही माथापच्ची देखते ही देखते यह पारिवारिक कलह पूरे गांव में चर्चा का विषय बन गई। रिश्तेदार और ग्रामीण दोनों पक्षों को समझाने में जुटे रहे, लेकिन भाई और बहनें अपनी-अपनी जिद पर अड़े रहे। इस खींचतान में 39 घंटे बीत गए और शव घर के आंगन में ही पड़ा रहा। भीषण गर्मी और समय बीतने के कारण शव के खराब होने की आशंका गहराने लगी, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
पुलिस के हस्तक्षेप और लिखित समझौते के बाद हुआ अंतिम संस्कार मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और संभ्रांत ग्रामीणों ने तुरंत हस्तक्षेप किया। थाने की पुलिस और ग्राम प्रधान की मौजूदगी में घंटों लंबी पंचायत बैठी। दोनों पक्षों को कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया गया और जमीन के बंटवारे को लेकर एक लिखित सहमति पत्र तैयार किया गया। दोनों पक्षों के हस्ताक्षर और सहमति बनने के बाद गतिरोध समाप्त हुआ। इसके बाद रोते-बिलखते परिजनों ने गमगीन माहौल में मृतक का अंतिम संस्कार संपन्न कराया।