रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली व पेपर लीक के खिलाफ राजधानी रांची में प्रतियोगी छात्रों का आंदोलन उग्र रूप धारण करता जा रहा है। ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने और भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों के आंदोलन के 24वें दिन सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच प्रस्तावित वार्ता के अचानक रद्द होने से छात्रों में भारी आक्रोश फैल गया है। छात्रों का कहना है कि सरकार सिर्फ आश्वासन का खेल खेल रही है, जबकि वे 14वीं जेपीएससी पीटी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द कर पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग पर अड़े हैं।
वार्ता रद्द होने से फूटा छात्रों का गुस्सा छात्र समन्वय समिति और जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर बातचीत का समय तय होने के बावजूद ऐन वक्त पर बैठक को टाल दिया गया। इससे नाराज अभ्यर्थियों ने धरना स्थल पर जोरदार नारेबाजी की और सरकार पर आंदोलन को टालमटोल की नीति से कमजोर करने का आरोप लगाया। छात्रों ने दो-टूक कहा कि वे पिछले 24 दिनों से बारिश और भीषण गर्मी के बीच सड़क पर बैठे हैं, लेकिन सरकार की ओर से ठोस और लिखित समाधान निकालने के बजाय सिर्फ समय खींचा जा रहा है।
प्रमुख मांगें और भूख हड़ताल पर अड़े अभ्यर्थी धरना स्थल पर कई छात्र-छात्राएं अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं, जिससे कुछ अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ने की भी खबर है। छात्रों की प्रमुख मांगें हैं:
14वीं जेपीएससी संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा (PT) और विवादित जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) परीक्षा को तत्काल रद्द किया जाए।
पिछले सात वर्षों में दोनों आयोगों द्वारा आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई या उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए।
परीक्षाओं में ओएमआर शीट (OMR Sheet) के दुरुपयोग को रोकने के लिए 'नॉट अटेम्प्टेड' (Not Attempted) का पांचवां विकल्प अनिवार्य किया जाए और भर्ती प्रक्रियाओं के लिए सख्त पारदर्शी कैलेंडर लागू हो।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्यमंत्री या सरकार की उच्चस्तरीय कमेटी ने उनकी मांगों पर लिखित अधिसूचना जारी नहीं की, तो यह आंदोलन केवल रांची तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे राज्य में 'चक्का जाम' और 'झारखंड बंद' जैसे बड़े कदमों में बदला जाएगा। इस बीच, विपक्षी दलों ने भी आंदोलनकारी छात्रों का समर्थन करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।